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विदेश

ड्रोन गिराने पर भड़का अमेरिका, ईरान के दो द्वीपों पर फाइटर जेट से भीषण बमबारी; खाड़ी में युद्ध का अलर्ट

US AirStrikes Iran Islands: अपना MQ-1 ड्रोन गिराए जाने के जवाब में अमेरिका ने ईरान के गोरुक और केश्म द्वीपों पर हवाई हमले किए हैं। रडार और कमांड सेंटर तबाह होने से मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है।

अमन उपाध्याय

US AirStrikes Iran Islands  Goruk Qeshm: मीडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष साल 2026 में एक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अपने एक जासूसी ड्रोन को मार गिराए जाने के जवाब में ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। सोमवार को अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान के दो द्वीपों पर भीषण बमबारी की, जिससे क्षेत्र में पूर्ण युद्ध छिड़ने की आशंका गहरा गई है।

ड्रोन गिराने का अमेरिका ने लिया बदला

तनाव की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में उड़ रहे अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराया। अमेरिका ने इसे 'उकसावे वाली कार्रवाई' करार देते हुए आत्मरक्षा में कदम उठाने का फैसला किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, शनिवार और रविवार को अमेरिकी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने तेजी से पलटवार किया और ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

गोरुक और केश्म द्वीप पर मची तबाही

अमेरिकी रक्षा विभाग ने बताया है कि ये हमले ईरान के गोरुक और केश्म द्वीप पर किए गए। इस सटीक बमबारी में ईरानी सेना का रडार सिस्टम, ड्रोन कंट्रोल स्टेशन और मुख्य कमांड सेंटर पूरी तरह नष्ट कर दिए गए हैं। इसके अलावा, अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान के उन दो घातक ड्रोनों को भी हवा में तबाह कर दिया, जो भविष्य में किसी हमले की तैयारी में थे। हालांकि, ईरान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिकी ड्रोन उनके हवाई क्षेत्र में घुस आया था और वे अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

कुवैत बना ईरान का नया निशाना

यह संघर्ष केवल द्वीपों तक सीमित नहीं रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे को अपनी मिसाइलों का निशाना बनाया है। इस भीषण हमले में कम से कम पांच अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने जानबूझकर इस बार कुवैत को चुना है ताकि वह अमेरिका को यह संदेश दे सके कि क्षेत्र में उसके सहयोगी देश भी सुरक्षित नहीं हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतरा

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दोनों देश 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को दोबारा खोलने के लिए एक नाजुक युद्धविराम की कोशिश कर रहे थे। दुनिया की तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यह सैन्य गतिरोध बढ़ता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

ईरान की अंडरग्राउंड मिसाइल साइट्स

अमेरिकी हमलों के थमने के तुरंत बाद, सैटेलाइट तस्वीरों और खुफिया सूचनाओं से पता चला है कि ईरान ने अपनी भूमिगत मिसाइल साइट्स को फिर से सक्रिय कर दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास ड्रोन और मिसाइलों का एक बड़ा जखीरा है, जिसे पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं है। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात किसी बड़ी जंग की ओर इशारा कर रहे हैं।

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