Global UN Weather Alert: संयुक्त राष्ट्र (UN) ने पूरी दुनिया के लिए एक बेहद खतरनाक नई चेतावनी जारी की है। इस नई रिपोर्ट के अनुसार आने वाले पांच सालों तक धरती का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर रहने वाला है। वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती लगातार और तेजी से बहुत ज्यादा गर्म होती जा रही है। आर्कटिक इलाके तेजी से गर्म हो रहे हैं और मौसम का संतुलन भी पूरी तरह बिगड़ रहा है।
इस गंभीर बदलाव के कारण दुनिया में कई जगहों पर भारी बारिश और कई जगहों पर सूखे का भयानक खतरा बढ़ सकता है। अब तक दर्ज किए गए सबसे गर्म 11 साल 2015 के बाद ही दुनिया में देखने को मिले हैं। मौसम और जलवायु एजेंसी का कहना है कि 2031 से पहले एक नया सबसे गर्म साल आने की पूरी संभावना है। यह पूरी दुनिया और मानव जाति के लिए एक बहुत ही बड़ा और अत्यंत गंभीर संकट बन चुका है।
संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगले पांच सालों में गर्मी काफी बढ़ने वाली है। 86 प्रतिशत संभावना है कि 2026 से 2030 के बीच कोई एक साल अब तक का सबसे गर्म साल बन जाएगा। यह नया साल 2024 की भीषण गर्मी के सारे रिकॉर्ड को भी पूरी तरह से पीछे छोड़ देगा।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन की रिपोर्ट के मुख्य लेखक लियोन हरमैनसन ने एक बहुत अहम जानकारी दुनिया को दी है। उनका कहना है कि 2026 के आखिर में प्राकृतिक जलवायु घटना अल नीनो के आने की पूरी संभावना है। इस वजह से 2027 के एक नया रिकॉर्ड बनाने वाला सबसे गर्म साल बनने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
साल 2015 के पेरिस जलवायु समझौते का मुख्य लक्ष्य धरती के बढ़ते तापमान को पूरी तरह से नियंत्रित रखना था। यह कोशिश थी कि तापमान 1850-1900 के औसत से 1.5 डिग्री सेल्सियस के नीचे ही सुरक्षित रहे। लेकिन अब 91 प्रतिशत संभावना है कि यह 1.5 डिग्री की इस अहम सीमा को जल्द ही पार कर जाएगा।
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वैज्ञानिकों के अनुसार 2026 से 2030 के बीच दुनिया का औसत तापमान काफी ज्यादा और खतरनाक रूप से बढ़ने वाला है। यह तापमान 1850-1900 के औद्योगिक दौर के औसत से 1.3 डिग्री से 1.9 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहने का अनुमान है। इंसान द्वारा कोयला और तेल जलाने से निकलने वाली गैसों को इस बड़े और गंभीर जलवायु परिवर्तन की मुख्य वजह माना जाता है।
इस नई रिपोर्ट में यह भी विस्तार से बताया गया है कि पूरे पांच साल का औसत तापमान कैसा रहने वाला है। 75 प्रतिशत संभावना है कि 2026-2030 के पांच साल का औसत तापमान भी 1.5 डिग्री से ऊपर ही रहेगा। इस समय भी भारत भीषण गर्मी से झुलस रहा है और पश्चिमी यूरोप भी बहुत गर्म मौसम की भयंकर चपेट में आ चुका है।