उपजाऊ मिट्टी हो चुकी खराब (सोर्स- सोशल मीडिया)
विदेश

UN की रिपोर्ट में दावा, आधी से ज्यादा धरती की उपजाऊ मिट्टी हो चुकी है पूरी तरह खराब

World Soil Health: संयुक्त राष्ट्र की चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की आधी से ज्यादा मिट्टी की हालत बहुत खराब है, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता पर भारी संकट मंडरा रहा है।

प्रिया सिंह

UN FAO Report On Soil Health: संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन ने डरावनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि दुनिया की आधी से अधिक उपजाऊ मिट्टी पूरी तरह खराब हो चुकी है। यह गंभीर संकट वैश्विक स्तर पर खाद्य आपूर्ति, जैव विविधता और विभिन्न जीव-जंतुओं के जीवन के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहा है।

हालांकि मिट्टी सुधारने के वैज्ञानिक तरीके विशेषज्ञों को पहले से मालूम हैं, लेकिन इन्हें अभी तक बड़े पैमाने पर अपनाया नहीं जा रहा है। UN के अनुसार दुनिया को मिट्टी का केवल दोहन करने की सोच छोड़कर उसकी देखभाल और सुरक्षा करने की जिम्मेदारी वाली सोच अपनानी होगी।

वैश्विक मिट्टी की बदहाली और इसके आंकड़े

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, धरती की मिट्टी हमारे कुल पचानवे प्रतिशत खाद्य पदार्थों के उत्पादन में मदद करती है और पर्यावरण को सुरक्षित रखती है। दुनिया में पाई जाने वाली लगभग 59 प्रतिशत प्रजातियां और पेड़-पौधें अपने जीवन के लिए पूरी तरह स्वस्थ मिट्टी पर ही निर्भर हैं।

इसके बावजूद, वर्तमान में दुनिया के 52.5 प्रतिशत क्षेत्रों में मिट्टी की देखभाल और प्रबंधन बहुत दयनीय स्थिति में है। साल 2015 के बाद से वैश्विक आबादी 80 करोड़ बढ़ गई है और खेती के लिए फ्रांस तथा जर्मनी के बराबर नई जमीन का उपयोग हो रहा है।

मृदा क्षरण के मुख्य कारण और बढ़ता संकट

विशेषज्ञों के अनुसार, मिट्टी की सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा तीव्र कटाव है, जिससे उपजाऊ परत पानी और हवा से बह जाती है। इसके अलावा, जैविक पदार्थों की कमी, रासायनिक खाद का गलत उपयोग, कीड़ों की घटती संख्या, बढ़ता नमक, कंक्रीट का फैलाव और प्रदूषण मुख्य कारण हैं।

यह खतरनाक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन इन समस्याओं को बढ़ा रहे हैं, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा भी गंभीर खतरे में पड़ चुकी है। अगर हम मिट्टी के स्वास्थ्य को फिर से बेहतर बनाने पर ध्यान दें, तो यह बढ़ते तापमान को कम करने और जलवायु संकट को झेलने में मदद करेगी।

मिट्टी को बचाने के उपाय और किसानों की मजबूरी

मृदा संरक्षण के लिए खेती में जुताई को कम करना या पूरी तरह बंद करना सबसे प्रभावी उपाय है, क्योंकि इससे सूक्ष्मजीवों को भारी नुकसान होता है। इसके साथ ही, मुख्य फसलों के बीच खाली समय में सरसों या दलहन जैसी कवर फसलें लगाना और खेतों में पेड़ लगाने की तकनीक भी जरूरी है।

जैविक और रासायनिक खादों का संतुलित उपयोग भी मिट्टी को बचा सकता है, लेकिन गरीब किसानों के पास इन तकनीकों को अपनाने के संसाधन नहीं हैं। वैश्विक स्तर पर किसानों के पास केवल जानकारी की कमी नहीं है, बल्कि इन तरीकों को शुरू करने में लगने वाली अधिक प्रारंभिक लागत उनकी मुख्य मजबूरी है।

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