जेलेंस्की के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग (फोटो- सोशल मीडिया) 
विदेश

जेलेंस्की की कुर्सी पर मंडराने लगा खतरा, सड़कों पर उतरे लाखों लोग; क्या है मामला

Protest Against Zelensky: यूक्रेन में वोलोडिमिर जेलेंस्की के खिलाफ जनता ने मंगलवार को सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। जनता नए हाल ही में पारित हुए विवादास्पद विधेयक का विरोध कर रही है।

अक्षय साहू

Protest Against Zelensky: रूस के साथ तीन साल से चल रहे युद्ध के कारण यूक्रेन में स्थिती तनावपूर्ण बनी हुई है। इसी बीच खबर आ रही है कि यूक्रेन की राजधानी कीव और कई बड़े शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतरकर राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। इसके बाद जेलेंस्की ने तुंरत एक आपातकाल मीटिंग बुलाई है।

मंगलवार को राजधानी कीव और यूक्रेन के अन्य शहरों में हजारों लोग एकत्र हुए, जिन्होंने राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से अपील की कि वे यूक्रेन की संसद द्वारा एक दिन पहले पारित विवादास्पद विधेयक को वीटो करें। शाम होते ही कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से बुधवार रात 8 बजे कीव के केंद्र में एक और प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया।

किस बात से नाराज है लोग

जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जेलेंस्की सरकार द्वारा हाल ही में पारित किए गए विधेयक नेशनल एंटी-करप्शन ब्यूरो (NABU) और स्पेशलाइज्ड एंटी-करप्शन प्रॉसिक्यूटर ऑफिस (SAPO) की स्वतंत्रता को खतरे में डाल सकते हैं। उनका कहना है कि सरकार इन कानूनों का इस्तेमाल भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए कर सकती है। नए प्रावधानों के तहत इन एजेंसियों पर अटॉर्नी जनरल के कार्यालय की पकड़ बढ़ जाएगी, जिससे उनकी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता और स्वतंत्रता प्रभावित होने की आशंका है।

रूस के साथ जारी युद्ध के बीच राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के लिए यह एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला अवसर है जब यूक्रेनी जनता ने उनके खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जेलेंस्की अपने करीबी सहयोगियों को बचाने के लिए एक विवादास्पद विधेयक पेश कर रहे हैं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल और यूरोपीय संघ के कुछ प्रमुख सदस्यों ने भी इस कदम की कड़ी आलोचना की है।

जेलेंस्की ने बुलाई आपात बैठक

वोलोडिमिर जेलेंस्की ने जनता के गुस्से और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए बुधवार को एक आपात बैठक बुलाई है। ताकि इसे लेकर एक संयुक्त रणनीति तैयार की जा सके। वहीं, विशेषज्ञों ने आंशका जताई है कि, अगर जल्द ही इस राजनीतिक समस्या को सुलझाया नहीं गया तो इसका असर रूस के साथ युद्ध पर भी पड़ सकता है। उनका मानना है कि इस प्रकार की घटना से पश्चिमी देशों की ओर से मिलने वाले समर्थन कमजोर हो सकता है।

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