डोनाल्ड ट्रम्प और फ्रेडरिक मर्ज, फोटो (सो. सोशल मीडिया)  
विदेश

Explainer: यूरोप में कहां और कितनी तैनात है अमेरिकी सेना? ट्रंप की धमकी से किन देशों पर पड़ेगा ज्यादा असर

Trump Threatens Europe: ईरान के साथ जारी युद्ध पर यूरोपीय देशों की आलोचना से भड़के ट्रंप ने जर्मनी, इटली और स्पेन से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की धमकी दी है। जानें इस फैसले का क्या होगा असर?

अमन उपाध्याय

Trump Threatens US Troops Withdrawal Europe: मीडिल ईस्ट में ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच अब अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच दरार गहरी होती जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले 48 घंटों में कई बार संकेत दिए हैं कि वे जर्मनी, इटली और स्पेन में तैनात अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप का यह कड़ा रुख उन यूरोपीय देशों के प्रति नाराजगी का परिणाम है जो ईरान युद्ध को संभालने के उनके तरीके की लगातार आलोचना कर रहे हैं।

क्यों बढ़ा तनाव?

तनाव की शुरुआत तब हुई जब जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि चल रहे युद्ध में अमेरिका को ईरान से अपमान का सामना करना पड़ रहा है। मेर्ज ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन के पास इस जंग को खत्म करने की कोई ठोस रणनीति नहीं है और इस युद्ध का सीधा नकारात्मक प्रभाव यूरोप की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इस आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर मेर्ज को आड़े हाथों लिया और कहा कि चांसलर को नहीं पता कि वे क्या बात कर रहे हैं। इसके तुरंत बाद, ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका जर्मनी में तैनात सैनिकों की संख्या कम करने की समीक्षा कर रहा है। जब उनसे इटली और स्पेन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे भी मदद नहीं कर रहे हैं, इसलिए वहां से भी सैनिकों को हटाना संभव है।

यूरोप में कहां हैं सैन्य ठिकाने?

यूरोप में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति द्वितीय विश्व युद्ध के समय से है। वर्तमान आंकड़ों की बात करें तो जर्मनी, इटली और स्पेन में कुल मिलाकर लगभग 53,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अकेले जर्मनी में ही 36,000 से अधिक पांच अलग-अलग सैन्य चौकियों पर सेना के जवान मौजूद हैं। इटली और स्पेन में तैनात सैनिक न केवल यूरोप की सुरक्षा के लिए बल्कि मीडिल ईस्ट और अफ्रीका में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए भी महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक हब के रूप में काम करते हैं।

अमेरिका- यूरोप तनाव, इन्फोग्राफिक

वहीं, जर्मनी में लैंडस्टुहल रीजनल मेडिकल सेंटर अमेरिका के बाहर उसका सबसे बड़ा अस्पताल है जहां जंग में घायल सैनिकों के उपचार किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन ठिकानों के बिना ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध में रसद आपूर्ति और सैन्य संचालन करना अमेरिका के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

क्या वाकई सेना हटा पाएंगे ट्रंप?

सैनिकों को हटाने की धमकी देना जितना आसान है उसे लागू करना उतना ही कठिन है। अमेरिकी कांग्रेस और कानून इसमें बड़ी बाधा बन सकते हैं। 2026 के राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम (NDAA) में एक ऐसा प्रावधान शामिल है जो यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की संख्या को 75,000 से कम करने पर रोक लगाता है। इससे पहले भी ट्रंप ने जर्मनी से 12,000 सैनिकों को हटाने की कोशिश की थी लेकिन तब जो बाइडन प्रशासन ने उस फैसले को पलट दिया था।

कीर स्टार्मर ने भी नहीं की ट्रंप की मदद

ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की भी आलोचना की है क्योंकि वे होर्मुज के मार्ग को दोबारा खोलने में वाशिंगटन की मदद नहीं कर रहे हैं। जिसके बाद से गठबंधन में लगातार तकरार देखने को मिल रही है। अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप अपने इस कड़े रुख पर कायम रहते हैं या यह केवल यूरोपीय देशों पर दबाव बनाने की एक रणनीति है।

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