ट्रम्प के प्लान से दुनिया में हड़कंप, कॉन्सेप्ट फोटो 
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Trump Nuclear Threat: ट्रंप के खौफ से परमाणु हथियार बनाने को मजबूर हुआ यूरोप, क्या 2026 में होगा महाविनाश?

US Russia Nuclear Deal: ट्रंप की नाटो विरोधी नीतियों और परमाणु परीक्षण के संकेतों ने यूरोप को डरा दिया है। सुरक्षा के लिए अब कई यूरोपीय देश खुद के परमाणु हथियार बनाने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं।

अमन उपाध्याय

US Europe News In Hindi:  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक और विस्तारवादी नीतियों ने एक बार फिर दुनिया को परमाणु असुरक्षा के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। ट्रंप के हालिया बयानों और नाटो के प्रति उनकी उदासीनता ने यूरोपीय देशों के बीच अपनी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।

ग्रीनलैंड जैसे इलाकों पर कब्जे की बयानबाजी और कनाडा व फ्रांस जैसे पुराने सहयोगियों को दी गई धमकियों के बाद अब यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए नए और कड़े परमाणु विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

खत्म होती संधियां और बढ़ता परमाणु जखीरा

परमाणु खतरे को और अधिक गंभीर बनाने वाला सबसे बड़ा पहलू अमेरिका और रूस के बीच की 'START' संधि का अंत है। यह संधि 5 फरवरी को समाप्त हो रही है, जिसके बाद दुनिया की इन दो महाशक्तियों पर परमाणु हथियारों की संख्या को लेकर कोई कानूनी पाबंदी नहीं रहेगी। संधि के नवीनीकरण को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच यह आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका और रूस दोनों ही अपने परमाणु भंडार को तेजी से बढ़ाना शुरू कर देंगे।

परमाणु परीक्षण के संकेत

खतरा केवल संधि के खत्म होने तक सीमित नहीं है। दक्षिण कोरिया में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात से कुछ घंटे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अमेरिका द्वारा भविष्य में परमाणु परीक्षण किए जाने की संभावना का संकेत दिया था। जानकारों का मानना है कि यदि अमेरिका खुले तौर पर परमाणु परीक्षण की ओर बढ़ता है, तो इससे पूरी दुनिया में हथियारों की एक नई और विनाशकारी होड़ शुरू हो जाएगी। ट्रंप के इस रवैये ने यूरोप समेत पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है।

यूरोप के सामने दो कठिन रास्ते

बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच यूरोप अब दो अहम विकल्पों पर मंथन कर रहा है। पहला विकल्प यह है कि फ्रांस और ब्रिटेन (यूरोप की परमाणु शक्तियां) अपने हथियारों की संख्या बढ़ाएं और फ्रांस पूरे यूरोप को एक 'न्यूक्लियर सुरक्षा छतरी' प्रदान करे।

हालांकि, दूसरा और कहीं अधिक खतरनाक विकल्प यह है कि यूरोप के कई अन्य देश अब खुद के परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाएं। सूत्रों के अनुसार, कुछ यूरोपीय देशों में इस विकल्प पर चर्चा पहले ही शुरू हो चुकी है।

वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे निर्णायक साल

विशेषज्ञों की मानें तो डोनाल्ड ट्रंप नाटो को एक 'बोझ' मानते हैं और उनके बयानों से यह डर गहरा गया है कि अमेरिका भविष्य में अपने सहयोगियों की सुरक्षा गारंटी से पीछे हट सकता है। ऐसे में साल 2026 परमाणु खतरों के लिहाज से दुनिया के लिए सबसे निर्णायक साल साबित हो सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एक भी गलत फैसला पूरी दुनिया को तबाही की कगार पर खड़ा कर सकता है।

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