ट्रंप का गोल्डन डोम प्रोजेक्ट (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

Golden Dome: ट्रंप के गोल्डन डोम प्रोजेक्ट से घबराए रूस और चीन, मिसाइल सिस्टम को बताया बड़ा खतरा

Trump Golden Dome: ट्रंप के गोल्डन डोम से रूस और चीन घबराए हुए हैं। इस नई मिसाइल डिफेंस प्रणाली को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।

प्रिया सिंह

Trump Golden Dome Missile Defense: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में महत्वाकांक्षी गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड प्रोजेक्ट की एक अहम घोषणा की थी। इजरायल के आयरन डोम की तर्ज पर बन रहा यह 'गोल्डन डोम' अंतरिक्ष और जमीन से मिसाइलों को रोकने में पूरी तरह सक्षम होगा।

इस नई और बेहद उन्नत रक्षा प्रणाली को देखकर रूस और चीन जैसे देशों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। इन देशों ने हाल ही में जारी संयुक्त बयान में इस भारी सैन्य तैनाती और मिसाइल सुरक्षा प्रणाली पर अपनी कड़ी आपत्ति और भारी नाराजगी जताई है।

प्रोजेक्ट की भारी लागत

ट्रंप ने इस उन्नत मिसाइल रक्षा प्रोजेक्ट की कुल लागत 175 बिलियन डॉलर बताई है, जो इसे बहुत महंगा बनाता है। हालांकि अमेरिकी कांग्रेस के बजट कार्यालय का अनुमान है कि 20 वर्षों में इसकी लागत 161 बिलियन डॉलर से 542 बिलियन डॉलर तक हो सकती है। यह शक्तिशाली हथियार अंतरिक्ष में भेजा जाने वाला अमेरिका का पहला हथियार होगा जिसे बनाने में करीब तीन साल लगेंगे। एक बार पूरी तरह से तैयार होने पर यह दुनिया के किसी भी हिस्से या अंतरिक्ष से दागी गई मिसाइलों को आसानी से रोक सकेगा।

कैसे काम करेगा सिस्टम

अमेरिकी सरकार के अनुसार इस अत्यंत उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम में सुरक्षा की कुल चार अलग-अलग लेयर शामिल होंगी। इनमें से एक लेयर पूरी तरह सैटेलाइट पर आधारित होगी, जबकि बाकी तीन लेयर जमीन से एक्टिव रूप में अपना काम करेंगी। जमीन से सक्रिय होने वाली इन तीनों लेयर को अमेरिका, अलास्का और हवाई में पूरी तरह से स्थित किया जाएगा। इन रणनीतिक स्थानों पर 11 छोटी दूरी की बैटरियों को भी लगाया जाएगा जो इस पूरे सिस्टम को बेहद मजबूत बनाएंगी।

रूस और चीन की चेतावनी

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बहुत कड़ा संयुक्त बयान जारी करके अमेरिका को घेरा है। उन्होंने कहा है कि ट्रंप की यह बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर बहुत ही गंभीर और नकारात्मक प्रभाव डालेगी। बीजिंग और मॉस्को ने अमेरिका का नाम लिए बिना परमाणु हथियार रखने वाले कुछ देशों की उकसावे वाली कार्रवाइयों की निंदा की। उनका कहना है कि इस तरह के सिस्टम अन्य देशों के मूलभूत सुरक्षा हितों को कमजोर करते हैं और वैश्विक रणनीतिक जोखिमों को बढ़ाते हैं।

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