अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (डिजाइन फोटो) 
विदेश

क्या थमेगा अमेरिका-ईरान तनाव? ट्रंप की बड़ी बैठक पर दुनिया की नजर, मिडिल ईस्ट में बढ़ी बेचैनी

Trump Cabinet Meeting: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज कैबिनेट की बैठक में ईरान के साथ तनाव समाप्त करने के प्रस्तावित समझौते पर चर्चा करेंगे। इस समझौते में होर्मुज स्ट्रेट जैसे मुद्दे शामिल हैं।

अमन उपाध्याय

Trump Cabinet Meeting Iran Peace Deal: दुनिया भर की निगाहें आज व्हाइट हाउस पर टिकी हैं, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक ऐसी बैठक की अध्यक्षता करने जा रहे हैं जो मिडल ईस्ट की दिशा बदल सकती है। ट्रंप के इस बैठक में मंत्रिमंडल के सदस्य शामिल होंगे, जहां ईरान के साथ चल रहे तनाव को को समाप्त करने के लिए तैयार किए गए प्रस्तावित समझौते को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी।

समझौते की मुख्य शर्तें

इस प्रस्तावित समझौते का केंद्र ईरान की परमाणु क्षमता को काफी हद तक कम करना और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना है। जानकारी के अनुसार, इस डील के तहत ईरान अपना अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार छोड़ने को तैयार दिख रहा है। इसके बदले में अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में बड़ी राहत दे सकता है। सूत्रों का कहना है कि इस यूरेनियम को 60 दिनों के भीतर किसी तीसरे देश को सौंपा जा सकता है या बेचा जा सकता है।

रिपब्लिकन नेताओं का कड़ा विरोध

भले ही राष्ट्रपति ट्रंप इसे अपनी एक बड़ी राजनीतिक जीत मान रहे हों लेकिन उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के अंदर से ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। सीनेटर रोजर विकर, लिंडसे ग्राहम और टेड क्रूज जैसे दिग्गज नेताओं का मानना है कि यह समझौता तेहरान के कट्टरपंथी शासन के लिए बहुत अधिक अनुकूल है। इन नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह प्रस्तावित डील पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के 2015 के परमाणु समझौते की याद दिलाती है, जिसे ट्रंप ने खुद अपने पिछले कार्यकाल में रद्द कर दिया था। उनका डर है कि प्रतिबंधों में राहत मिलने से ईरान अपने 'प्रॉक्सी' गुटों को और मजबूत करेगा।

तनाव के बीच सुलह की कोशिश

यह कूटनीतिक हलचल ऐसे समय में हो रही है जब सोमवार को ही दक्षिणी ईरान में अमेरिकी हमलों के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया था। जहां पेंटागन ने इन हमलों को 'रक्षात्मक' करार दिया, वहीं ईरान ने इसे अमेरिका का 'धोखा' बताया है।

विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिए हैं कि स्थायी युद्धविराम और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने में अभी समय लग सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए यहां तक कह दिया कि अगर ईरान पूरी तरह आत्मसमर्पण भी कर दे, तो भी मुख्यधारा का मीडिया इसे ईरान की ही जीत बताएगा।

क्षेत्रीय चुनौतियां

ट्रंप की योजना केवल ईरान तक सीमित नहीं है। वह चाहते हैं कि इस समझौते के साथ ही सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान जैसे देशों को भी 'अब्राहम एकॉर्ड्स' में शामिल किया जाए। हालांकि, इस प्रस्ताव पर फिलहाल खाड़ी देशों की ओर से कोई उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली है क्योंकि सऊदी अरब अभी भी एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना को प्राथमिकता दे रहा है। इसके साथ ही लेबनान में इजरायल की बढ़ती सैन्य कार्रवाई और हिजबुल्लाह का मुद्दा भी इस समझौते की राह में एक बड़ा रोड़ा बना हुआ है।

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