पैतोंगटार्न शिनावात्रा (फोटो- सोशल मीडिया) 
विदेश

दुश्मन को चाचा कहना पड़ा भारी, थाईलैंड की PM शिनावात्रा को पद से धोना पड़ा हाथ

Thailand News: थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा को एक लीक कॉल में नैतिक आचरण उल्लंघन के आरोप में बर्खास्त किया गया; कंबोडिया से विवाद और राजनीतिक समर्थन में गिरावट ने हालात बिगाड़े।

अक्षय साहू

Paetongtarn Shinawatra Fired: थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा को बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को एक संवैधानिक अदालत उनके पद से आधिकारिक तौर पर बर्खास्त कर दिया। हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया कि उन्होंने कोई धोखाधड़ी या बेईमानी नहीं की, लेकिन एक लीक हुई फोन कॉल के माध्यम से उन्होंने नैतिक आचरण के मानकों का उल्लंघन किया। यह कॉल कंबोडिया के पूर्व राष्ट्रपति हुन सेन के साथ हुई थी, जिसमें सीमा विवाद को लेकर बातचीत की गई थी। इसके कुछ ही दिनों बाद थाईलैंड और कंबोडिया के बीच झड़पें शुरू हो गईं।

38 वर्षीय पैतोंगटार्न, पूर्व प्रधानमंत्री और विवादास्पद अरबपति थाकसिन शिनावात्रा की बेटी हैं। उन्हें जुलाई में 36 सीनेटरों द्वारा दायर एक याचिका के आधार पर पद से निलंबित किया गया था। इस याचिका में उन पर नैतिक आचरण के उल्लंघन, बेईमानी, और देशहित में कार्य न करने के आरोप लगाए गए थे।

‘चाचा’ कहने पर शुरू हुआ विवाद

विवाद का एक बड़ा कारण यह भी बना कि फोन कॉल के दौरान पैतोंगटार्न ने हुन सेन को 'चाचा' कहकर संबोधित किया। विपक्षी दलों और कई नागरिकों ने इसे थाईलैंड की गरिमा के खिलाफ माना। पैतोंगटार्न ने सफाई दी कि उनके पिता और हुन सेन के पुराने संबंधों के कारण उन्होंने ऐसा कहा था। लेकिन जब हुन सेन ने यह कॉल सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर दी, तो देश में राजनीतिक भूचाल आ गया।

फोन कॉल में पैतोंगटार्न ने कंबोडिया के सैन्य कमांडर को 'दुश्मन' कहा, जिसे थाई विपक्ष ने थाई सेना का अपमान करार दिया। इस विवाद के बाद उनकी सरकार को समर्थन देने वाली मुख्य गठबंधन पार्टी ने दूरी बना ली। वहीं, सीमावर्ती तनाव ने जुलाई में उग्र रूप लिया, जिससे 40 से अधिक लोग मारे गए और करीब तीन लाख लोग विस्थापित हो गए।

राजनीतिक भविष्य पर छाए काले बादल

पैतोंगटार्न ने अदालत में बयान देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा देश के हित में काम किया है। इसके बावजूद, अदालत के फैसले ने उनके राजनीतिक करियर पर गहरी चोट पहुंचाई है। वह हाल के वर्षों में पद से हटाई जाने वाली दूसरी प्रधानमंत्री बनी हैं और पिछले 17 वर्षों में संवैधानिक अदालत द्वारा हटाई गई एक और नेता के रूप में दर्ज हो गई हैं। हालांकि, विवाद बढ़ने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा देकर संस्कृति मंत्री का पद संभाल लिया था।

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