तारिक रहमान (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

4 साल की उम्र में गए थे जेल...अब संभालेंगे बांग्लादेश PM की कुर्सी, जानें क्या है तारिक रहमान की असली कहानी

Bangladesh Election 2026 Result: तारिक रहमान, जियाउर रहमान और खालिदा जिया के बेटे, लंबे निर्वासन के बाद BNP के नेतृत्व में लौटे और 13वें आम चुनाव में प्रचंड जीत के साथ बांग्लादेश के नए PM बनेंगे।

अक्षय साहू

BNP Wins Bangladesh Election 2026: तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनकी अगुवाई में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 13वें आम चुनावों में शानदार जीत हासिल की है। शुरुआती रुझानों के अनुसार पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिलने की संभावना है। अब तारिक सिर्फ जियाउर रहमान और खालिदा जिया के उत्तराधिकारी नहीं हैं, बल्कि वर्तमान बांग्लादेश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक भी बन चुके हैं। जिस देश में उन्हें 17 साल तक निर्वासन में रहना पड़ा, अब उसका नेतृत्व उनके हाथ में होगा।

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

तारिक रहमान को राजनीति में तारिक जिया के नाम से भी जाना जाता है। उनका जीवन और राजनीतिक पहचान काफी हद तक उनके परिवार से जुड़ी रही है। वे जियाउर रहमान और खालिदा जिया के पुत्र हैं। उनका जन्म 1967 में उस समय के पूर्वी पाकिस्तान में हुआ, जो अब बांग्लादेश है।

4 साल की उम्र जाना पढ़ा था जेल

1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान, जब बांग्लादेश ने स्वतंत्रता हासिल की, तारिक महज चार साल के थे और कुछ समय के लिए उन्हें हिरासत में रखा गया। बीएनपी उन्हें “युद्ध के सबसे कम उम्र के बंदियों में से एक” के रूप में सम्मान देती है। कुछ वर्षों बाद उनके पिता जियाउर रहमान की हत्या कर दी गई, तब तारिक केवल 15 साल के थे। इसके बाद उनकी परवरिश उनकी मां, खालिदा जिया, के मार्गदर्शन में हुई, जिन्होंने बाद में बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल किया।

राजनीति में कदम रखा

तारिक ने 23 साल की उम्र में राजनीति में कदम रखा। इससे पहले उन्होंने ढाका यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पढ़ाई की। राजनीतिक सक्रियता की शुरुआत उन्होंने उस समय की, जब सैन्य शासक हुसैन मुहम्मद इरशाद के खिलाफ आंदोलन चल रहा था और उन्होंने BNP का दामन थामा।

गिरफ्तारी, निर्वासन और संघर्ष

2007 में तारिक रहमान को भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। जेल में उन्हें शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। उनकी रिहाई की शर्त यह थी कि वे कुछ समय के लिए राजनीति से दूर रहें। रिहाई के बाद 2008 में वे इलाज के लिए लंदन चले गए और लंबे समय तक बांग्लादेश लौटे नहीं।

 इस दौरान शेख हसीना सत्ता में लौट आईं और BNP के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल भेजा गया। 2018 में, 2004 में हसीना की रैली पर हुए हमले के मामले में, तारिक रहमान को उनकी अनुपस्थिति में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। BNP का कहना था कि यह प्रयास जिया परिवार को राजनीति से हमेशा के लिए बाहर करने का था। ब्रिटेन में रहते हुए तारिक रहमान अपनी पत्नी, जो हृदय रोग विशेषज्ञ हैं, और बेटी के साथ जीवन व्यतीत कर रहे थे।

वापसी और राजनीतिक सफलता

शेख हसीना के सत्ता से हटने और अपनी मां की स्वास्थ्य स्थिति खराब होने के बाद, तारिक ने फिर से बांग्लादेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना शुरू की। खालिदा जिया के निधन के बाद उन्हें BNP का चीफ बनाया गया। पहले ही चुनाव में उन्होंने प्रचंड जीत हासिल की। यह जीत केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उस पारिवारिक विरासत का सम्मान भी है, जिसे वे अपने कंधों पर लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

लालू परिवार की बढ़ीं मुश्किलें! ट्रांसफर के बाद नए जज प्रशांत कुमार करेंगे लैंड फॉर जॉब मामले की सुनवाई

विवाद के बाद ECI ने फॉर्म 6 में किया बदलाव, SIR से जुड़ा Annexure-D को हटाया; लेकिन इन राज्यों में रहेगा जारी

INDIA Bloc Meeting: EVM से बैलेट पेपर तक, राहुल के सारे सबूत गए बेकार, अब खरगे ने रखीं चुनाव सुधार की 6 मांगें

भारत में आएं और निवेश करें...अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स से बोले मंत्री पीयूष गोयल, SME पार्टनरशिप का दिया न्योता

CAFE-III Norms: 2027 से बदलेंगे कारों के फ्यूल एफिशिएंसी नियम, जानें नई गाड़ियों पर क्या होगा असर