जंग की तैयारी में तालिबान, फोटो (सो.सोशल मीडिया) 
विदेश

अमेरिका का हथियार बनेगा काल! जंग की तैयारी में तालिबान, पाकिस्तान सीमा पर तैनात 1,500 कमांडो

Afghanistan Pakistan Tension: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बढ़ते तनाव के बीच तालिबान ने 1,500 से अधिक प्रशिक्षित कमांडो पंजशीर से हटाकर सीमा पर तैनात कर दिए, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।

अमन उपाध्याय

Taliban US Weapons: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच तालिबान ने बड़े पैमाने पर सैन्य तैयारी शुरू कर दी है। अफगानिस्तान इंटरनेशनल के सूत्रों के मुताबिक तालिबान ने पंजशीर से अपने 1,500 से ज्यादा प्रशिक्षित कमांडो हटाकर उन्हें कंधार, हेलमंद और जाबुल के उन इलाकों में तैनात कर दिया है जो पाकिस्तान की सीमा से सटे हैं। इन कमांडो यूनिट्स को विशेष रूप से संभावित पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई का मुकाबला करने के लिए तैयार किया गया है।

सूत्र बताते हैं कि तालिबान का यह कदम पाकिस्तान को एक स्पष्ट ‘संदेश’ देने की कोशिश है कि नई अफगान सरकार किसी भी बाहरी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के संबंध लगातार खराब हुए हैं। हाल ही में सीमा पर गोलीबारी की घटनाएं हुईं और पाकिस्तान ने तालिबान पर टीटीपी को पनाह देने का आरोप लगाया, वहीं तालिबान ने पाकिस्तानी ड्रोन हमलों पर तीखी आपत्ति जताई।

तालिबान की सैन्य क्षमता कितनी है?

2021 में अमेरिका के अफगानिस्तान से हटने के बाद छोड़े गए हथियार और सैन्य उपकरण आज तालिबान की ताकत की मुख्य आधारशिला बन गए हैं। वर्तमान में तालिबान के पास मौजूद संसाधन कुछ इस प्रकार हैं-

  • करीब 78 अमेरिकी सैन्य विमान
  • 40,000 से अधिक सैन्य वाहन, जिनमें बख्तरबंद गाड़ियां भी शामिल
  • 3 लाख से ज्यादा आधुनिक हथियार
  • सोवियत दौर के कई पुराने टैंक, जिन्हें हाल ही में पुनः चालू कर युद्धयोग्य बनाया गया है

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में आरोप लगाया कि बाइडन प्रशासन ने 7 बिलियन डॉलर के सैन्य संसाधन तालिबान को छोड़ दिए। अब वे इसे वापस मांग रहे हैं। तालिबान ने साफ किया कि ये संसाधन अफगानिस्तान की संपत्ति हैं और वापस नहीं होंगे।

तालिबान की नई रणनीति

युद्ध से हटकर अब तालिबान की नजरें अफगानिस्तान के 1 ट्रिलियन डॉलर के मिनरल रिजर्व पर टिक गई हैं। खासकर लिथियम, जिसे दुनिया "नया सोना" कह रही है। चीन और रूस इस क्षेत्र में पहले से भारी निवेश कर चुके हैं, जबकि ट्रंप भी इन खदानों में दिलचस्पी जता चुके हैं। तालिबान समझता है कि आने वाला समय अफगानिस्तान की खनिज संपत्ति ही तय करेगी कि उसका भविष्य युद्ध में है या आर्थिक ताकत बनने में।

रिश्तों में बढ़ती खटास

पाकिस्तान और तालिबान के रिश्ते पिछले एक साल से लगातार बिगड़ रहे हैं। सीमा पर तनाव, टीटीपी का मुद्दा, ड्रोन हमलों के आरोप इन सबने हालात को बेहद नाजुक बना दिया है। तालिबान को शक है कि पाकिस्तान की कोई भी सैन्य कार्रवाई अमेरिका के समर्थन से हो सकती है। इसलिए जरूरत पड़ने पर वे रूस और चीन से मदद लेने की रणनीति बना रहे हैं, जिनका अफगानिस्तान में निवेश तेजी से बढ़ा है।

BRICS Summit 2026 LIVE: चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग कल आएंगे भारत, शाम 5.45 बजे PM मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक

Elephant Madhuri Return: वनतारा से कोल्हापुर लौटेगी माधुरी, वापसी से पहले किए गए खास इंतजाम

DUSU Election 2026: चुनावी रण में 6 महिलाएं, 4 पदों के लिए चुनाव; यूनिवर्सिटी प्रशासन की तैयारी पूरी

मोदी ने बताया BRICS की ताकत, पुतिन ने G7 पर साधा निशाना...बिजनेस फोरम में संबोधन की 10 बड़ी बातें

BRICS Business Forum की फैमिली फोटो में शामिल हुए PM मोदी, वैश्विक मंच पर दिखी एकजुटता