अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने संविधान तैयार किया (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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तालिबान ने बनाया अपना 'शरिया' संविधान, अपराध करने पर भी अमीरों को नहीं होगी सजा, महिलाओं के बाहर निकलने पर...

Afghanistan News: तालिबान का संविधान शरिया को सर्वोच्च मानता है, समाज को वर्गों में बांटता है, महिलाओं व अल्पसंख्यकों पर कड़े प्रतिबंध लगाकर मानवाधिकारों को कमजोर करता है और शासन व्यवस्था।

अक्षय साहू

Taliban Constitution: अगस्त 2021 में सत्ता संभालने के लगभग पांच साल बाद तालिबान ने अफगानिस्तान के लिए अपना नया संविधान तैयार कर लिया है। इसे राजपत्र के माध्यम से देशभर में लागू करने की योजना है। इस संविधान में कुल 10 खंड और 119 अनुच्छेद शामिल हैं। पूरे दस्तावेज में शरिया कानून को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और यह स्पष्ट किया गया है कि शासन व्यवस्था पूरी तरह शरिया के सिद्धांतों के अनुरूप संचालित होगी।

बीबीसी पश्तो की एक रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान द्वारा प्रस्तावित यह संविधान सामाजिक असमानता को संस्थागत रूप देता है और इससे अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति और अधिक कमजोर होने की आशंका है। तालिबान सरकार का नेतृत्व सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुनजादा कर रहे हैं, जिनके अधीन यह संविधान तैयार किया गया है।

अफगान समाज को तीन वर्गों में बांटा

संविधान के अनुच्छेद-9 में अफगान समाज को तीन वर्गों में विभाजित किया गया है पहला विद्वानों का, दूसरा अभिजात वर्ग का और तीसरा आम नागरिकों का। इस वर्गीकरण का सीधा असर न्याय व्यवस्था पर पड़ता है। छोटे या सामान्य अपराधों के मामलों में विद्वानों और अभिजात वर्ग को सजा से छूट देने का प्रावधान किया गया है, यह तर्क देते हुए कि इन्हें आदतन अपराधी नहीं माना जाता। विद्वानों को अदालत में पेश होने से भी छूट दी गई है। इसके विपरीत, वही अपराध यदि आम नागरिकों द्वारा किए जाते हैं तो उनके लिए कारावास जैसी सज़ाओं का प्रावधान है। संविधान में महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए कड़े और प्रतिबंधात्मक नियम शामिल किए गए हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं की स्वतंत्रता को बेहद सीमित कर दिया गया है। शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी पर पहले से मौजूद पाबंदियों को कानूनी रूप दिया गया है। कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की व्यवस्था भी की गई है।

अपराधों से जुड़े मामलों सख्त कानून

अपराधों से जुड़े कई मामलों में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार न्यायविदों को सौंपा गया है, जबकि किसास और हद्द जैसे मामलों में सरकार को हस्तक्षेप का अधिकार प्राप्त है। तालिबान शासन अब तक मुख्य रूप से फरमानों के माध्यम से चलाया गया है। 2021 से अब तक कुल 470 फरमान जारी किए जा चुके हैं, जिनमें अधिकांश शरिया कानून और विशेष रूप से महिलाओं से जुड़े प्रतिबंधों पर केंद्रित रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र की संस्था OCHA के अनुसार, इन नीतियों ने अफगानिस्तान की सामाजिक और आर्थिक संरचना को गहराई से प्रभावित किया है। महिलाओं की सार्वजनिक उपस्थिति और आर्थिक भागीदारी लगभग समाप्त हो चुकी है, जिससे देश का सामाजिक संतुलन और भविष्य दोनों गंभीर संकट में दिखाई देते हैं। 

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