सियोल में विरोध प्रदर्शन, फोटो- IANS 
विदेश

दक्षिण कोरिया: चुनाव में धांधली के आरोपों के बीच दोबारा मतदान की मांग, सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारी

Seoul Election Protest: दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में स्थानीय चुनावों में धांधली के आरोपों को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी और विपक्षी दल दोबारा चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।

अमन उपाध्याय

South Korea Seoul Election Protest In Hindi: दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में पिछले सप्ताह हुए स्थानीय चुनावों में कथित धांधली के दावों ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी के पूर्वी हिस्से में स्थित सोंगपा जिले के एसके ओलंपिक हैंडबॉल जिम्नेजियम के बाहर हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी पिछले तीन दिनों से डेरा डाले हुए हैं। इन प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट रूप से मानना है कि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और वे अब नए सिरे से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने किया घेराव

जानकारी के अनुसार, रविवार दोपहर तक लगभग 3,000 लोग धरना स्थल पर जमा थे, हालांकि शनिवार को यह संख्या 30,000 के करीब पहुंच गई थी। प्रदर्शनकारियों ने जिम्नेजियम परिसर के सभी आठ प्रवेश द्वारों को घेर रखा है ताकि अंदर रखी मतपेटियों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके। वे लगातार चुनाव दोबारा कराने के समर्थन में नारेबाजी कर रहे हैं। इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच शनिवार को करीब 20 से 30 चुनाव अधिकारी वहां से निकलने में कामयाब रहे लेकिन राष्ट्रीय चुनाव आयोग (एनईसी) ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

बैलेट पेपर की कमी

राजधानी सियोल में  चुनाव के दौरान अव्यवस्था की खबरें बुधवार को ही सामने आने लगी थीं, जब सियोल के सोंगपा और गंगनम जैसे प्रमुख क्षेत्रों सहित 12 से अधिक मतदान केंद्रों पर बैलेट पेपर कम पड़ गए थे। इस कमी के कारण कई घंटों तक मतदान रोकना पड़ा और निराश होकर कई मतदाता बिना वोट डाले ही वापस लौट गए। इस प्रशासनिक विफलता की जिम्मेदारी लेते हुए राष्ट्रीय चुनाव आयोग के अध्यक्ष रोह ताए-अक और महासचिव हेओ चेओल-हून ने शुक्रवार को अपने पदों से इस्तीफे की पेशकश कर दी है।

विपक्ष के तीखे तेवर

मुख्य विपक्षी दल, पीपल पावर पार्टी (पीपीपी) ने इस विरोध प्रदर्शन को 'शांतिपूर्ण नागरिक प्रतिरोध आंदोलन' करार दिया है। पार्टी नेता जांग डोंग-ह्योक ने नेशनल असेंबली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मांग की है कि केवल जांच या अधिकारियों को बदलने से जनता का गुस्सा शांत नहीं होगा, बल्कि दोबारा चुनाव ही एकमात्र समाधान है।

उन्होंने राष्ट्रपति ली जे-म्युंग से इस मुद्दे पर तत्काल वार्ता का प्रस्ताव रखा है। विपक्ष ने राष्ट्रपति को चेतावनी भी दी है कि यदि वे इस संकट को सुलझाए बिना अपनी निर्धारित यूरोप यात्रा पर जाते हैं, तो उन्हें और अधिक व्यापक जन-विरोध का सामना करना पड़ेगा।

राष्ट्रपति ने जताया नाराजगी

राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए इस पूरी घटना पर खेद जताया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस गड़बड़ी की तह तक जाएं और दोषियों की जवाबदेही तय करें। फिलहाल, सियोल की सड़कों पर तनाव बरकरार है और पूरी दुनिया की नजरें दक्षिण कोरिया के इस चुनावी संकट के समाधान पर टिकी हैं।

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