दक्षिण कोरिया जन्म दर, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

9 साल बाद राहत: 'बुजुर्गों का देश' दक्षिण कोरिया फिर से चहका, जन्म दर में ऐतिहासिक सुधार के संकेत

South Korea Birth Rate: दक्षिण कोरिया में करीब एक दशक बाद जन्म दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कोविड के बाद बढ़ी शादियां और सरकारी प्रोत्साहन इस सकारात्मक बदलाव के मुख्य कारण माने जा रहे हैं।

अमन उपाध्याय

Population Crisis Recovery In South Korea: दुनिया के सबसे गंभीर जनसंख्या संकट से जूझ रहे दक्षिण कोरिया से एक उम्मीद भरी खबर सामने आई है। लगभग 9 साल के लंबे इंतजार के बाद, देश की जन्म दर में हल्की लेकिन महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसे लंबे समय से जारी डेमोग्राफिक संकट के बीच एक सकारात्मक मोड़ माना जा रहा है। सियोल के कन्वेंशन सेंटरों में लगे बेबी फेयर्स में उमड़ती युवाओं की भीड़ इस बदलते माहौल की तस्दीक कर रही है।

आंकड़ों में दिख रहा है सुधार

CNN की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में दक्षिण कोरिया की कुल प्रजनन दर गिरकर 0.721 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई थी, जो पूरी दुनिया में सबसे कम थी। हालांकि, साल 2024 के आंकड़ों ने विशेषज्ञों को चौंका दिया है। 9 साल में पहली बार यह दर बढ़कर 0.748 तक पहुंच गई है। इतना ही नहीं पिछले 17 महीनों से लगातार हर महीने पैदा होने वाले बच्चों की संख्या पिछले साल के मुकाबले अधिक रही है।

बदलाव के 4 प्रमुख कारण

विशेषज्ञों ने इस सुधार के पीछे चार मुख्य वजहें बताई हैं:

  • कोविड के बाद शादियों में तेजी: महामारी के दौरान टल गई शादियां अब हो रही हैं जिससे बच्चों की संख्या बढ़ी है।
  • जनसांख्यिकीय बदलाव: 'बेबी बूमर' पीढ़ी के बच्चे अब 30 वर्ष के आसपास हैं जो परिवार शुरू करने की सही उम्र मानी जाती है।
  • कार्यस्थल संस्कृति में सुधार: दफ्तरों में अब प्रेग्नेंसी और पैरेंटल लीव को लेकर समझ बढ़ी है जिससे महिलाएं अब दूसरे या तीसरे बच्चे का प्लान भी कर रही हैं।
  • सरकारी प्रोत्साहन: सरकार पिछले एक दशक से हाउसिंग सब्सिडी, चाइल्ड केयर और यहां तक कि डेटिंग इवेंट्स पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है।

चुनौतियां अब भी बरकरार

इस सकारात्मक रुझान के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि राह अभी भी कठिन है। दक्षिण कोरिया में बच्चों की परवरिश को दुनिया में सबसे महंगा माना जाता है जहां प्राइवेट ट्यूशन और क्रैम स्कूल्स पर भारी खर्च होता है। इसके अलावा, बच्चों की देखभाल की मुख्य जिम्मेदारी अभी भी महिलाओं पर ही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह बढ़ोत्तरी अस्थायी हो सकती है क्योंकि कोरोना वॉयरस के बाद की शादियों का असर कुछ वर्षों में कम हो सकता है।

AI बॉस की बड़ी चेतावनी! सैम ऑल्टमैन और डारियो अमोदेई बोले- AI इंसानियत के लिए खतरा बन सकता है

विपक्ष की भूमिका सिर्फ दिखावा, चुनाव आयोग की नियुक्ति कमेटी पर जस्टिस दीपांकर दत्ता का बड़ा सवाल

Cooking Oil Price: सोयाबीन-पाम से सूरजमुखी तक तेल पर घटा कस्टम्स ड्यूटी, आज से लागू होंगे नए रेट

3 दशक निर्वासन भी नहीं तोड़ पाई आजादी का जुनून, कौन थी मैडम भीकाजी कामा जिन्होंने बनाया था भारत का पहला झंंडा

अंबानी को पछाड़ अडानी ने मारी बाजी, देश के अमीरों में 15 नए नाम शामिल, ये रही लिस्ट