India To Buy Javelin Anti-Tank Missile System: भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने ऐलान किया की भारत अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है। गोर ने कहा कि कहा कि भारत की प्रस्तावित खरीद से दोनों देशों के बीच को-प्रोडक्शन के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग इस समय रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच चुका है।
जैवलिन एक एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम है जिसे कंधे पर उठाकर कहीं भी ले जाया जा सकता है। इसे अमेरिका में हथियार बनाने वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन और RTX ने मिलकर टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है। इस उपयोग अमेरिका और उसकी सहयोगी सेनाएं बड़े स्तर पर करती हैं।
जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम का खासियत
कंधे से फायर किए जाने वाले इस सिस्टम में ऑटोमैटिक गाइडेंस मैकेनिज्म मौजूद होता है, जो लॉन्च के बाद मिसाइल को अपने टारगेट को ट्रैक करने में मदद करता है। इससे ऑपरेटर को तुरंत अपनी स्थिति बदलने और कवर लेने का समय मिल जाता है। यानी मिसाइल दागने के बाद सैनिक जवाबी फायरिंग की चपेट में आने से बचने के लिए दूसरी जगह जा सकता है और जरूरत पड़ने पर वहां से सिस्टम को दोबारा लोड कर सकता है।
जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम की खासियत इसकी आर्च्ड टॉप-अटैक ट्रैजेक्टरी है। इसमें मिसाइल सीधे टारगेट पर हमला करने के बजाय ऊपर की ओर जाती है और फिर लक्ष्य के ऊपरी हिस्से पर वार करती है। यह रणनीति टैंक या बख्तरबंद वाहनों के उन हिस्सों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल की जाती है, जहां कवच सबसे कमजोर होता है।
टारगेट चुनने के लिए गनर कर्सर का इस्तेमाल करता है। इसके बाद कमांड लॉन्च यूनिट मिसाइल को फायर किए जाने से पहले लॉक-ऑन सिग्नल भेजती है, जिससे मिसाइल को निर्धारित लक्ष्य की ओर निर्देशित किया जा सके। इसका सॉफ्ट-लॉन्च डिजाइन सिस्टम को बंद स्ट्रक्चर, जिसमें बिल्डिंग और बंकर शामिल हैं।
भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से रक्षा सहयोग में तेजी आई है। नवंबर 2025 में अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत को 100 जैवलिन सिस्टम और 216 एक्सकैलिबर गाइडेड आर्टिलरी प्रोजेक्टाइल की संभावित बिक्री को मंजूरी दी थी। इस प्रस्तावित डील की अनुमानित कीमत 93 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी।
भारत पहले से ही अपनी M777 हॉवित्जर तोपों के साथ एक्सकैलिबर गाइडेड एम्युनिशन का इस्तेमाल करता है। इसके अलावा, दोनों देशों ने पिछले साल एक व्यापक रक्षा साझेदारी के लिए एक फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य जमीन, समुद्र, हवा, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करना है।
भारत अब तक अमेरिका से कई प्रमुख रक्षा प्लेटफॉर्म खरीद चुका है। इनमें अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर, C-17 और C-130J ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, P-8I मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट और M777 हॉवित्जर शामिल हैं।