Russia Support Iran In War Against US: अमेरिका के साथ जारी युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच रूस ने ईरान के समर्थन में बड़ा बयान दिया है। किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से मुलाकात की। इस द्विपक्षीय बैठक में पुतिन ने मुश्किल दौर में ईरान को जरूरी सैन्य उपकरण, गोला-बारूद और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति का भरोसा दिया।
रूस और ईरान के बीच हुई बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव ने क्षेत्रीय तनाव को काफी बढ़ा दिया है। पुतिन ने स्पष्ट संकेत दिया कि रूस अपने सहयोगी ईरान को तत्काल जरूरत के मुताबिक रक्षा उपकरण और दूसरी आवश्यक मदद उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस समर्थन को दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के तौर पर देखा जा रहा है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी संकट के बीच रूस का यह रुख अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
इसी वर्ष फरवरी 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। इस संघर्ष का असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट पर भी पड़ा है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ईरान को ड्रोन से जुड़े पुर्जे और आधुनिक गोला-बारूद उपलब्ध करा रहा है। इनका इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई में किया जा सकता है। हालांकि, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रूसी मदद के असर को कम बताते हुए दावा किया कि ईरान की हवाई उड़ानों पर प्रतिबंध लगने की स्थिति में यह समर्थन काफी हद तक कमजोर हो सकता है।
रूस और ईरान का सैन्य सहयोग काफी पुराना है। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के शुरुआती वर्ष में ईरान ने रूस को बड़ी संख्या में ‘शाहेद’ ड्रोन उपलब्ध कराए थे। इन ड्रोनों का इस्तेमाल यूक्रेन के सैन्य और नागरिक ठिकानों पर हमलों में किया गया।
इसी सहयोग के कारण यूक्रेन और ईरान के संबंधों में तनाव बढ़ा। इस वर्ष जुलाई में यूक्रेन द्वारा कैस्पियन सागर में सैन्य साजो-सामान ले जा रहे एक ईरानी समुद्री जहाज पर हमला किए जाने की घटना ने तनाव को और बढ़ा दिया।
बिश्केक में हुए SCO शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने साझा घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किया। इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले पश्चिमी देशों के ‘एकतरफा प्रतिबंधों’ की आलोचना की गई।
बैठक में रूस और ईरान के अलावा भारत, बेलारूस, कजाकिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान समेत कई देश शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान पश्चिमी दबाव के खिलाफ साझा रुख भी देखने को मिला।
वहीं, क्रेमलिन ने आगामी APEC सम्मेलन में पुतिन, डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित त्रिपक्षीय बैठक के संकेत भी दिए हैं। ऐसे में रूस का ईरान के साथ खड़ा होना आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति और मध्य पूर्व के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।