Jaishankar India UNSC Campaign: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर कुवैत में रक्षा, व्यापार और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर गहन चर्चा पूरी करने के बाद, जयशंकर गुरुवार को ओमान पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। यह दौरा भारत के पश्चिम एशिया दृष्टिकोण और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ओमान पहुंचने पर विदेश मंत्रालय के महानिदेशक शेख अहमद अल मस्करी ने एस. जयशंकर की अगवानी की। जयशंकर ने सोशल मीडिया के माध्यम से ओमान में मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। कुवैत और ओमान जैसे देश भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं और इस यात्रा ने इन संबंधों को एक नया आयाम प्रदान किया है।
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ओमान आने से पहले जयशंकर ने कुवैत में शीर्ष नेतृत्व के साथ सिलसिलेवार बैठकें कीं। उन्होंने कुवैत के प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को दोनों देशों के लिए और अधिक फायदेमंद बनाने के विजन की सराहना की।
सबसे महत्वपूर्ण चर्चा कुवैत के रक्षा मंत्री अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सलेम अल-सबाह के साथ रही, जिसमें रक्षा उद्योग में सहयोग और समुद्री सुरक्षा को लेकर विशेष रूप से बातचीत हुई। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में समुद्री रास्तों की सुरक्षा भारत के व्यापारिक हितों के लिए अनिवार्य है।
कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह के साथ बैठक के दौरान जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्षों के वैश्विक प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कुवैत सरकार का वहां रह रहे विशाल भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए आभार जताया।
जयशंकर ने ऊर्जा, निवेश, तकनीक, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की और विश्वास जताया कि आने वाले समय में ये रिश्ते और अधिक प्रगाढ़ होंगे। उन्होंने भारतीय समुदाय के लोगों से भी सीधी बातचीत की और भारत के बदलते स्वरूप और दुनिया में भारत की बढ़ती धमक के बारे में विस्तार से बताया।
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खाड़ी देशों के इस सफल दौरे के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर का अगला गंतव्य न्यूयॉर्क है। आगामी 13 जुलाई को वे न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 2028-29 की अवधि के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके तुरंत बाद, 14-15 जुलाई को वे ब्रसेल्स में भारत-यूरोपीय संघ (EU) ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की तीसरी बैठक में हिस्सा लेंगे, जहां वे यूरोपीय संघ और बेल्जियम के अपने समकक्षों के साथ व्यापार और नई तकनीक पर रणनीतिक चर्चा करेंगे।