ईरान-US तनाव थमते ही एक्टिव हुआ भारत, जयशंकर 10 दिन में 6 देशों के दौरे पर, चीन-पाक की बढ़ी बेचैनी!

Jaishankar Mission Middle East: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होते ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर 6 देशों के 10 दिवसीय दौरे पर निकल गए हैं, जिसका उद्देश्य वैश्विक मंच पर भारत की पकड़ मजबूत करना है।
India swings into action as Iran-US tensions ease; Jaishankar to visit six countries in 10 days sparking anxiety in China and Pakistan!
एस. जयशंकर, फोटो ( सो. सोशल मीडिया)
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S Jaishankar Mission Middle East News In Hindi: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव के शांत होते ही भारत ने अपनी वैश्विक कूटनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज यानी 5 जुलाई 2026 से एक अत्यंत महत्वपूर्ण 10 दिवसीय बहु-देशीय दौरे पर रवाना हो चुके हैं।

यह दौरा न केवल पश्चिम एशिया के देशों के साथ भारत के संबंधों को प्रगाढ़ करेगा, बल्कि संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ जैसे वैश्विक मंचों पर भी भारत की स्थिति को नई ऊंचाई प्रदान करेगा। यह यात्रा भारत की उस दूरदर्शी रणनीति का हिस्सा है जो आने वाले दशकों में वैश्विक राजनीति में देश की भूमिका तय करेगी।

तीन चरणों में बंटा है यह मेगा मिशन

विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह 10 दिवसीय दौरा 5 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक चलेगा, जिसे तीन रणनीतिक हिस्सों में विभाजित किया गया है। यह कोई सामान्य विदेश यात्रा नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी और ठोस रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए भारत वैश्विक स्तर पर अपनी कूटनीति का 'रिसेट' बटन दबा रहा है।

पहला चरण: खाड़ी देशों के साथ बढ़ते होते रिश्ते

अपने दौरे की शुरुआत में जयशंकर 5 से 10 जुलाई तक पश्चिम एशिया के चार प्रमुख देशों कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के दौरे पर रहेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन देशों के नेतृत्व से मुलाकात का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाना है।

भारत यह साफ कर चुका है कि खाड़ी देशों के साथ उसके संबंध केवल तात्कालिक जरूरतों के लिए नहीं हैं, बल्कि ये एक गहरी, टिकाऊ और सुरक्षा पर आधारित साझेदारी है। जंग के बाद बदले हुए हालातों में ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करना भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है।

दूसरा चरण: न्यूयॉर्क में UNSC के लिए अभियान

दौरे के दूसरे चरण में विदेश मंत्री अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर पहुंचेंगे। यहां 13 जुलाई को वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के कार्यकाल 2028-29 के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। यह वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत और नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित करने का एक बड़ा अवसर होगा। UNSC में भारत की स्थायी या प्रभावशाली मौजूदगी के लिए यह अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तीसरा चरण: ब्रसेल्स में व्यापार और तकनीक पर चर्चा

यात्रा के अंतिम चरण में जयशंकर बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स पहुंचेंगे। 14-15 जुलाई को वह तीसरी भारत-यूरोपीय संघ (EU) व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वह यूरोपीय संघ और बेल्जियम के अपने समकक्षों से मिलकर तकनीक, व्यापार और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।

भारत की दूरदर्शी बिसात

भारत की यह सक्रियता केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मजबूत आर्थिक और ऊर्जा हित भी जुड़े हैं। आंकड़ों के अनुसार, जून में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बना रहा है, जिसका आयात मई के मुकाबले 19.4 प्रतिशत बढ़कर 773.78 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया है।

एक तरफ अमेरिका से ऊर्जा संसाधनों का बढ़ता आयात और दूसरी तरफ कतर व ओमान जैसे देशों के साथ तालमेल, भारत की उस दीर्घकालिक बिसात का हिस्सा है जो वैश्विक पटल पर भारत की स्थिति को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और मजबूत बना देगा।

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