बांग्लादेश में हिंदुओं का प्रदर्शन (सोर्स- AI) 
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बांग्लादेश में हिंदुओं का विरोध प्रदर्शन: ढाका में गूंजे 'जय श्री राम' के नारे, सड़कों पर उतरे लोग

Hindu Protest: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हजारों हिंदुओं ने भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान और रंगपुर क्षेत्र में प्रस्तावित विशाल राम मूर्ति परियोजना को रोके जाने के विरोध में प्रदर्शन किया।

दिव्या सिंह

Bangladeshi Hindu Protest in Dhaka: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। राजधानी ढाका में शुक्रवार को हजारों हिंदू समुदाय के लोगों ने भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान और एक प्रस्तावित विशाल राम मूर्ति परियोजना को रोके जाने के विरोध में प्रदर्शन किया।

ढाका में निकाला गया मशाल जुलूस

हिंदू संगठनों के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग ढाका के शाहबाग क्षेत्र में एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने मशाल जुलूस निकाला और विभिन्न मांगों को लेकर नारेबाजी की। इसके बाद प्रदर्शनकारी नेशनल प्रेस क्लब तक मार्च करते हुए पहुंचे, जहां मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया गया।

क्या है विवाद का कारण?

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस महीने की शुरुआत में गाइबांधा क्षेत्र में आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान भगवान राम की तस्वीर का अपमान किया गया था। उनका कहना है कि मामले में शिकायत दर्ज होने के बावजूद अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जिससे समुदाय में नाराजगी बढ़ी है।

राम मूर्ति परियोजना क्यों चर्चा में है?

उत्तरी बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी क्षेत्र में एक मंदिर परिसर में 81 फीट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा का निर्माण प्रस्तावित था। परियोजना से जुड़े लोगों का दावा है कि विरोध और कथित धमकियों के कारण निर्माण कार्य रोक दिया गया है। इस परियोजना में भगवान कृष्ण और भगवान शिव की बड़ी प्रतिमाएं भी प्रस्तावित बताई गई हैं।

सरकार को दिया गया अल्टीमेटम

हिंदू संगठन ने सरकार से कथित अपमान मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और मूर्ति निर्माण कार्य को दोबारा शुरू कराने की मांग की है। हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो देशव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा।

इस घटनाक्रम के बाद बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदाय की चिंताओं को गंभीरता से संबोधित किए जाने की आवश्यकता है ताकि सामाजिक सौहार्द और विश्वास कायम रह सके।

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