Rafah Border Crossing News In Hindi: इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्धविराम के बीच एक बड़ी प्रगति देखने को मिली है। सोमवार को गाजा पट्टी और मिस्र के बीच स्थित राफा बॉर्डर क्रॉसिंग को सीमित आवाजाही के लिए फिर से खोल दिया गया। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह कदम फिलहाल काफी हद तक प्रतीकात्मक है क्योंकि अभी बहुत कम लोगों को ही सीमा पार करने की अनुमति दी जाएगी और किसी भी तरह के सामान की आवाजाही पर रोक बरकरार है।
मिस्र के एक अधिकारी के अनुसार, परिचालन के पहले दिन दोनों दिशाओं से केवल 50-50 फिलिस्तीनियों के सीमा पार करने की उम्मीद थी। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के आंकड़ों के मुताबिक, इस समय लगभग 20,000 फिलिस्तीनी बच्चे और वयस्क, जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है, इस क्रॉसिंग के जरिए गाजा से बाहर निकलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। युद्ध के कारण गाजा की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जिसके कारण हजारों लोग इलाज के लिए मिस्र जाने का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर, गाजा के बाहर फंसे हजारों फिलिस्तीनी भी अपने घर लौटने की प्रतीक्षा में हैं।
राफा क्रॉसिंग की सुरक्षा और निगरानी के लिए इजरायल, मिस्र और यूरोपीय संघ (EU) के सीमा गश्ती एजेंटों को तैनात किया गया है। इजरायल और मिस्र मिलकर सीमा पार करने वाले लोगों की जांच करेंगे। समझौते के तहत, राफा क्रॉसिंग और उन क्षेत्रों के बीच का हिस्सा जहां अधिकांश फिलिस्तीनी रहते हैं फिलहाल इजरायली सेना के नियंत्रण में है। भविष्य में यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो यात्रियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
सीमा खुलने की सकारात्मक खबर के बीच गाजा में हिंसा का दौर थमा नहीं है। सोमवार को ही गाजा के दक्षिणी शहर खान यूनिस के तट पर स्थित एक टेंट कैंप पर इजरायली नौसेना के हमले में 3 वर्षीय फिलिस्तीनी बच्चे की मौत हो गई। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 10 अक्टूबर को युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक इजरायली गोलीबारी में 520 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं जिनमें 100 से अधिक बच्चे शामिल हैं। युद्ध की शुरुआत से अब तक कुल 71,800 से अधिक फिलिस्तीनी अपनी जान गंवा चुके हैं।
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राफा बॉर्डर का खुलना अमेरिकी मध्यस्थता वाले युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण की ओर एक बड़ा कदम है। इस चरण में गाजा के शासन के लिए एक नई फिलिस्तीनी समिति का गठन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती, हमास का निरस्त्रीकरण और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू करना शामिल है। हालांकि, जमीनी स्तर पर चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं।