नरेंद्र मोदी और मोहम्मद बिन जायद, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

होर्मुज पर टेंशन बढ़ी तो UAE ने चला मास्टरस्ट्रोक, PM मोदी की यात्रा के बीच सामने आया बड़ा प्लान, जानें सबकुछ

PM Modi UAE Visit: PM मोदी के UAE दौरे के बीच यूएई ने होर्मुज को बाईपास करने वाली पाइपलाइन परियोजना की घोषणा की है। 2027 तक शुरू होने वाली यह योजना वैश्विक तेल आपूर्ति को सुरक्षित और सुचारू बनाएगी।

अमन उपाध्याय

PM Modi UAE Visit MBZ Oil Pipeline Project: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया गया है, जिसके तहत यूएई ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाईपास करने वाली एक नई तेल पाइपलाइन परियोजना में तेजी लाने का ऐलान किया है।

इस 'मेगा प्लान' का मुख्य उद्देश्य ईरान के प्रभाव वाले समुद्री मार्ग पर निर्भरता कम करना है, ताकि वैश्विक बाजार में तेल और गैस की सप्लाई बिना किसी बाधा के सुरक्षित रूप से जारी रह सके।

2027 तक तैयार होगा होर्मुज का विकल्प

अबू धाबी मीडिया कार्यालय के अनुसार, यह पाइपलाइन फुजेराह के रास्ते ओमान की खाड़ी तक तेल पहुंचाएगी। इस परियोजना को 2027 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। एक बार यह पाइपलाइन पूरी तरह चालू हो गई, तो फुजेराह के रास्ते यूएई की निर्यात क्षमता दोगुनी हो जाएगी। यह सीधे अबू धाबी को ओमान की खाड़ी से जोड़ेगी, जिससे जहाजों को विवादित होर्मुज से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। गौरतलब है कि 6 मार्च 2026 से होर्मुज का रास्ता बंद है और वहां से केवल ईरान की अनुमति से ही जहाज गुजर रहे हैं।

युद्धस्तर पर चल रहा है निर्माण कार्य

क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने इस पाइपलाइन निर्माण को लेकर 'युद्धस्तर' पर काम करने के निर्देश दिए हैं। यूएई फिलहाल क्षेत्रीय तनाव के कारण सबसे अधिक संकट में है क्योंकि उसके पास तेल निर्यात के लिए कोई अन्य सुरक्षित समुद्री मार्ग उपलब्ध नहीं है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में यूएई ओमान और सऊदी अरब की मदद से सड़क मार्ग के जरिए अपना सामान भेज रहा है। इस वैकल्पिक रूट पर प्रतिदिन कम से कम 3500 ट्रक चल रहे हैं, जो सामान को सऊदी के पोर्ट तक पहुंचाते हैं।

पीएम मोदी के साथ क्या हुई चर्चा

पीएम मोदी और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद (MBZ) के बीच हुई मुलाकात में होर्मुज के सुरक्षित संचालन पर जोर दिया गया। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि होर्मुज का सुरक्षित खुलना दुनिया के लिए जरूरी है और यहां अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन होना चाहिए। तनावपूर्ण माहौल के बावजूद अब तक भारत के करीब 15 जहाज फारस की खाड़ी से सुरक्षित निकले हैं। यूएई की यह नई पाइपलाइन भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा का एक नया और भरोसेमंद अध्याय लिखेगी।

तेल उत्पादन की क्षमता जोर

यूएई ने वैश्विक बाजार में अपनी पैठ बढ़ाने और तेल उत्पादन की क्षमता को 2027 तक 50 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचाने के लिए खुद को ओपेक प्लस से अलग कर लिया है। होर्मुज को बाईपास करने वाली नई पाइपलाइन के माध्यम से यूएई न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रहा है, बल्कि दुनिया की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी एक निर्णायक भूमिका निभाने की तैयारी में है।

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