दुश्मनों की नींद उड़ाने की तैयारी! वायुसेना को मिलेंगे 114 नए फाइटर जेट, 3.3 लाख करोड़ का मेगा प्लान तैयार

Indian Air Force 114 Rafale Deal: भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील का टेंडर (RFP) तैयार हो गया है। जानिए 3.3 लाख करोड़ के इस प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी।
Preparing to Give Enemies Sleepless Nights! Air Force to Receive 114 New Fighter Jets; Mega Plan Worth ₹3.3 Lakh Crore Ready.
राफेल लड़ाकू विमान, फोटो (सो. AI)
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Indian Air Force 114 Rafale Deal News In Hindi: सीमा पर चीन और पाकिस्तान की बढ़ती चुनौतियों के बीच भारतीय वायुसेना अपनी मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाने की तैयारी में लग गया है। सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना ने 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोग्राम के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) यानी टेंडर के शुरुआती दस्तावेजों को अंतिम रूप दे दिया है जो न केवल देश की सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि 'मेक इन इंडिया' अभियान को भी बड़ा बढ़ावा देगा।

चीन-पाक के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगा यह प्रोजेक्ट

भारतीय वायुसेना इस समय लड़ाकू विमानों के स्क्वाड्रन की भारी कमी का सामना कर रही है। दो मोर्चों पर एक साथ जंग की स्थिति से निपटने के लिए कम से कम 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है। जबकि वर्तमान संख्या इससे काफी कम है। इसी कमी को दूर करने के लिए 114 विमानों के इस प्रोजेक्ट को 'गेम चेंजर' माना जा रहा है। लगभग 3.3 लाख करोड़ रुपये की इस डील से आसमान में भारत की बादशाहत और मजबूत होगी।

22 सीधे आएंगे, 92 भारत में बनेंगे

इस सौदे की सबसे खास बात यह है कि इस योजना के अनुसार, कुल 114 विमानों में से 22 विमान 'Fly-away' स्थिति में यानी सीधे फ्रांस से उड़कर भारत आएंगे। इससे वायुसेना की तत्काल जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। शेष 92 विमानों का निर्माण 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में ही किया जाएगा। इसमें भारतीय कंपनियों की बड़ी हिस्सेदारी होगी और विमानों में करीब 55 से 60 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

आखिर राफेल ही क्यों?

भारत पहले ही 36 राफेल विमानों को अपने बेड़े में शामिल कर चुका है, जिससे इनके रखरखाव और पायलटों की ट्रेनिंग का बुनियादी ढांचा पहले से तैयार है। राफेल अपनी बेहतरीन मारक क्षमता, आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है।ऑपरेशन सिंदूर में अपनी क्षमता साबित करने के बाद भारत के लिए यह एक 'War Tested' यानी जंग की कसौटी पर खरा उतरा विमान है।

कब तक शुरू होगी डिलीवरी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वायुसेना प्रमुख के आगामी फ्रांस दौरे से ठीक पहले इस सौदे पर तेजी से काम चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, यदि 2026 तक इस सौदे पर अंतिम हस्ताक्षर हो जाते हैं तो पहला लड़ाकू जेट अनुबंध के करीब 3 से 4 साल बाद यानी 2029 या 2030 तक वायुसेना को मिल सकता है। 92 विमानों के भारत में निर्माण से देश में हजारों नौकरियों के अवसर भी पैदा होंगे और भारत 'ग्लोबल डिफेंस हब' बनने की ओर अग्रसर होगा।

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