मसूद अजहर (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

पाकिस्तानी आतंकी संगठनों का नया पैंतरा: गाजा राहत के नाम पर जुटा रहे हैं भारत विरोधी गतिविधियों के लिए फंड

Jaish Lashkar Network: जैश और लश्कर गाजा संकट की आड़ में डिजिटल वॉलेट्स से आतंकी फंड जुटा रहे हैं। मसूद अजहर का परिवार इसका नेतृत्व कर रहा है, जो भारत के लिए बड़ा सुरक्षा खतरा है।

प्रिया सिंह

Pakistan terror groups digital funding: पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने अपनी भारत विरोधी साजिशों को नया रूप देना शुरू कर दिया है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ये संगठन गाजा संकट का भावनात्मक लाभ उठाकर 'राहत कार्यों' के नाम पर भारी मात्रा में धन एकत्र कर रहे हैं। चिंताजनक यह है कि इस एकत्रित राशि का उपयोग आतंकी ढांचे के पुनर्निर्माण और नए कैडरों की भर्ती के लिए किया जा रहा है। थिंक टैंक ‘जियोपॉलिटिको’ ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचने के लिए अब ये संगठन पारंपरिक बैंकिंग के बजाय आधुनिक डिजिटल तकनीकों का सहारा ले रहे हैं।

फंडिंग के बदले तौर-तरीके

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की कड़ी निगरानी से बचने के लिए पाकिस्तानी आतंकी संगठनों ने अपनी 'मोडस ऑपरेंडी' में बड़ा बदलाव किया है। अब वे बैंक खातों के बजाय ईज़ीपैसा, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल वॉलेट्स के जरिए सीधे चंदा इकट्ठा कर रहे हैं, जिनकी निगरानी करना वैश्विक संस्थाओं के लिए चुनौतीपूर्ण है।

मसूद अजहर के परिवार की भूमिका

जियोपॉलिटिको की रिपोर्ट में जैश प्रमुख मसूद अजहर के परिवार के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी का दावा किया गया है। मसूद का बेटा हम्माद अजहर और भाई तल्हा अल-सैफ कथित तौर पर गाजा सहायता के नाम पर चल रहे इस आतंकी वित्तपोषण अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। वे धार्मिक कार्यों और मस्जिदों के पुनर्निर्माण के बहाने लोगों से डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से आर्थिक मदद मांग रहे हैं।

गाजा संकट बना ढाल

7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुए इज़राइल-हमास युद्ध ने इन संगठनों को फंड जुटाने का एक सुविधाजनक और भावनात्मक बहाना दे दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, मानवीय सहायता के नाम पर एकत्रित धन का एक बड़ा हिस्सा जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पाकिस्तान की राज्य एजेंसियां FATF की निगरानी व्यवस्था में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर इन गतिविधियों को मौन समर्थन दे रही हैं।

प्रवासी नेटवर्क का दुरुपयोग

ये आतंकी संगठन दशकों से खाड़ी और पश्चिमी देशों में बसे पाकिस्तानी प्रवासियों का उपयोग फर्जी चैरिटी संगठनों के माध्यम से धन जुटाने के लिए कर रहे हैं। अतीत में भी राहत कार्यों के नाम पर जमा किए गए धन का उपयोग 2008 के मुंबई हमलों जैसी बड़ी आतंकी साजिशों में किया गया था। नए भर्ती अभियान के तहत युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने के लिए इसी विदेशी फंडिंग का सहारा लिया जा रहा है।

वैश्विक सुरक्षा को बड़ा खतरा

रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने डिजिटल वॉलेट्स और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए हो रहे इस अवैध धन प्रवाह को नहीं रोका, तो दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति और खराब हो सकती है। आतंकी संगठनों द्वारा अपने ढांचे का पुनर्निर्माण करना न केवल भारत बल्कि पूरे वैश्विक शांति के लिए एक बड़ी चुनौती है।

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