शहबाज शरीफ (सोर्स- सोशस मीडिया) 
विदेश

गैस-तेल चोरी करने वालों पर लगेगा आतंकी एक्ट...पाकिस्तान सरकार ले आई नया कानून, 14 साल की होगी जेल

Pakistan News: पाकिस्तान की शहबाज सरकार ने तेल और गैस की चोरी, तस्करी और अवैध भंडारण को अब 'आतंकवाद' घोषित कर दिया है। नए कानून के तहत 14 साल की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

अक्षय साहू

Pakistan Petroleum Law Amendment 2026: पाकिस्तान सरकार ने देश में बढ़ते तेल और गैस संकट को देखते हुए एक सख्त कदम उठाया है। अब तेल और गैस का अवैध भंडारण, तस्करी या चोरी को आतंकवाद की श्रेणी में रखा गया है। सोमवार को नेशनल असेंबली में इस संबंध में आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया गया।

इस विधेयक पास होने के बाद, पाकिस्तान में तेल और गैस का अवैध भंडारण या तस्करी करना अब गंभीर अपराध माना जाएगा और सरकार चाहती है तो इसके तहत टेरर एक्ट भी लागू किया जा सकता है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते पाकिस्तान गैस और तेल की भारी किल्लत का सामना कर रहा है।

शहबाज सरकार ने क्यों उठाया?

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार का कहना है कि आतंकवादी पहले पाइपलाइन या तेल ठिकानों को नुकसान पहुंचाते हैं और फिर माफियाओं के माध्यम से तेल और गैस को महंगे दामों पर बेचते हैं। इन पैसों का इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए किया जाता है। इसी वजह से सरकार ने तेल और गैस को लेकर सख्त कानून लाने का निर्णय लिया है।

हाल ही में बलूचिस्तान में एक तेल पाइपलाइन पर हमला हुआ, जिससे क्वैटा और बलूचिस्तान समेतआसपास के कई इलाकों में सप्लाई बाधित हुई। सरकार ने अभी तक इस हमले के पीछे की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं की है।

क्या है गैस-पेट्रोल को लेकर नए कानून?

पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार के अनुसार, नए विधेयक में निम्न प्रावधान शामिल हैं:

  • चोरी पर सजा: अगर कोई व्यक्ति तेल या गैस चोरी करते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा। सजा के तहत 14 साल तक की जेल और 3 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • तस्करी और भंडारण: तेल या गैस की तस्करी या अवैध भंडारण करने वाले को 10 साल तक की जेल हो सकती है। पेट्रोलियम पाइपलाइन पर हमला करने वाले के खिलाफ भी सख्त सजा का प्रावधान है।
  • वारंट की जरूरत नहीं: आरोपित को पकड़ने के लिए किसी वारंट की आवश्यकता नहीं होगी।अधिकारी स्वत: कार्रवाई कर सकेंगे।
  • आतंकवाद के आरोप: आतंकवादी मामलों में भी यही नियम लागू होंगे। आरोपित को पकड़ने के लिए वारंट की जरूरत नहीं होगी, और आरोपितों को न्यूनतम 14 साल की सजा सुनाई जाएगी।

इस कदम का मकसद पाकिस्तान में तेल और गैस की अवैध गतिविधियों और आतंकवादी फंडिंग को रोकना है, ताकि देश के ऊर्जा संकट और सुरक्षा स्थिति में सुधार हो सके।

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