शहबाज शरीफ ( AI फोटो) 
विदेश

पाकिस्तान के लिए अच्छा होगा कि... सिंधु जल संधि पर पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने ये क्या कह दिया; देश में मची खलबली

Indus Water Treaty: भारत द्वारा सिंधु जल संधि स्थगित करने के बाद पाकिस्तानी विशेषज्ञ हसन अब्बास ने दावा किया है कि यह समझौता पूरी तरह भारत के पक्ष में है और पाक को इससे तुरंत बाहर निकल जाना चाहिए।

अमन उपाध्याय

Pakistan Indus Water Treaty Latest News In Hindi: भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुरानी सिंधु जल संधि अब टूटने की कगार पर पहुंचती दिख रही है। भारत द्वारा इस संधि को स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान के भीतर से ही विरोध के सुर उठने लगे हैं। पाकिस्तान के एक प्रमुख जल विशेषज्ञ ने अब इस्लामाबाद को इस समझौते से बाहर निकलने की कड़वी सलाह दी है, जिसे लेकर दोनों देशों के कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

65 साल में पहली बार भारत का कड़ा रुख

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर पिछले एक साल से अधिक समय से तनाव बना हुआ है। दरअसल, अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 से चली आ रही इस संधि को स्थगित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। 65 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार है जब भारत ने इस समझौते पर रोक लगाई है। भारत के इस कदम के बाद से पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगा रहा है कि भारत पानी के बहाव को रोककर उसके पंजाब प्रांत की खेती को बर्बाद कर रहा है।

पाकिस्तानी एक्सपर्ट का सनसनीखेज दावा

इस विवाद के बीच पाकिस्तान के जल विज्ञान और जल संसाधन विशेषज्ञ हसन अब्बास ने एक लेख में सिंधु जल संधि (IWT) की प्रासंगिकता पर ही सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने इस संधि को पूरी तरह से भारत के पक्ष में बताया है। अब्बास का तर्क है कि पाकिस्तान को इस संधि से कुछ हासिल नहीं हुआ और अब उसके पास खोने के लिए भी कुछ नहीं बचा है। उनके अनुसार, 1960 में हुई इस संधि की बुनियाद ही भारत के विशेषाधिकारों पर टिकी थी।

पूर्वी और पश्चिमी नदियों का गणित

हसन अब्बास ने आरोप लगाया कि भारत ने हमेशा से रावी, ब्यास और सतलुज जैसी पूर्वी नदियों पर अपना पूर्ण अधिकार रखा और पाकिस्तान का हिस्सा इसमें शून्य रहा। वहीं, पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) को पाकिस्तान के हिस्से में डालना भारत की एक भौगोलिक मजबूरी थी, क्योंकि ये नदियां ऊंचे पहाड़ों से होकर गुजरती हैं जहां पानी को मोड़ना या स्टोर करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था। इसके बाद, संधि ने भारत को इन नदियों पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बनाने का 'असीमित अधिकार' दिया। एक्सपर्ट ने आगे कहा कि भारत ने उस हर बूंद को अपने पास रखा जिसे वह मोड़ने में सक्षम था और पाकिस्तान को केवल वही पानी मिला जिसे भारत रोक नहीं सकता था।

बर्लिन नियम और संधि से बाहर निकलने की सलाह

पाकिस्तानी विशेषज्ञ ने इस्लामाबाद को सलाह दी है कि उसे इस संधि से बाहर निकल जाना चाहिए। उनका मानना है कि संधि न होने पर भी पाकिस्तान को वही पानी मिलता रहेगा जो उसे भौगोलिक स्थिति के कारण अभी मिल रहा है।

उन्होंने सुझाव दिया कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय जल पर 'बर्लिन नियम 2024' का सहारा लेना चाहिए और पर्यावरण व मानवाधिकारों के आधार पर अपना पक्ष अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रखना चाहिए। साथ ही, उन्होंने भारत पर नदियों में प्रदूषण फैलाने के बेबुनियाद आरोप भी लगाए, जिसे वे संधि से निकलने का एक आधार मानते हैं।

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