कुवैत के इन दावों से उड़ी दुनिया की नींद; ईरान के मंसूबों से पश्चिम एशिया में बढ़ा महायुद्ध का खतरा!

Kuwait Missile Drone Attack: कुवैत ने दावा किया है कि उस पर भीषण मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं। US-ईरान के बीच युद्धविराम के दावों के बीच इस घटना ने वैश्विक तनाव और तेल संकट बढ़ा दिया है।
Kuwait's Claims Send Shockwaves Across the Globe; Iran's Designs Heighten the Risk of a Major War in West Asia!
सांकेतिक एआई फोटो
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Iran Kuwait Missile Drone Attack News In Hindi: पश्चिम एशिया में शांति की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। कुवैत ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर यह दावा किया है कि उस पर मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन से हमला किया गया है।

इस सनसनीखेज दावे ने न केवल खाड़ी देशों में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि पूरी दुनिया में तेल की कीमतों और सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरी कर दी हैं। यह हमला ऐसे नाजुक समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए सीजफायर की बातचीत चल रही है।

सीजफायर के बीच भीषण हमला

कुवैती सेना ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि उनके क्षेत्र को निशाना बनाया गया है, हालांकि रणनीतिक कारणों से उन ठिकानों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है जिन्हें निशाना बनाया गया था। घटना के कुछ ही घंटों बाद, ईरान ने भी क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई करने की बात स्वीकार की है लेकिन उसने यह नहीं बताया है कि उसके हमले का सटीक स्थान क्या था।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट

इस तनाव का सबसे बड़ा असर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर पड़ा है, जो दुनिया के प्रमुख तेल व्यापार मार्ग के रूप में जाना जाता है। युद्ध के कारण यह मार्ग अभी बंद है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसका सीधा असर वैश्विक महंगाई पर दिख रहा है। खुद कुवैत के लिए भी स्थिति बेहद गंभीर हो गई है, क्योंकि वह पिछले 30 वर्षों में पहली बार एक महीने के भीतर एक बैरल तेल भी निर्यात करने में विफल रहा है। अमेरिका में भी इस जंग के कारण ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है। जिससे वहां की आम जनता में भारी नाराजगी है।

ईरान का पलटवार

क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिकी सेना ने भी मोर्चा संभाल लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के पास खतरा पैदा कर रहे ईरान के 4 आत्मघाती ड्रोन मार गिराए हैं।

इसके अलावा, पेंटागन ने इसे 'रक्षात्मक कार्रवाई' बताते हुए दक्षिणी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइटों और बंदर अब्बास स्थित एक ईरानी ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को भी निशाना बनाया। जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि उसने उस एयर बेस पर जवाबी हमला किया है जहां से अमेरिकी ऑपरेशन संचालित किए जा रहे थे।

शांति वार्ता पर मंडराया खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ बातचीत में प्रगति का दावा किया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के भंडार को खत्म कर दे, जबकि ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाने और जब्त संपत्ति वापस पाने की मांग पर अड़ा है।

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