रॉकेट के परीक्षण को देखते किम जोंग उन।  
विदेश

उत्तर कोरिया ने दुनिया के सबसे तेज रॉकेट राक्षसी KN-25 का किया सफल टेस्ट, चीन तक रेंज

Kim Jong Un Rocket Test : दुनिया का सबसे लंबी दूरी वाला रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम केएन-25 माना जाता है। चीन का पीसीएल-191 सिस्टम 500 किमी तक मार में सक्षम है। वह बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल करता है।

रंजन कुमार

North Korea KN-25 Rocket : उत्तर कोरिया ने दुनिया के सबसे लंबी दूरी वाले रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम केएन-25 का सफल टेस्ट किया है। इस अभ्यास में सिस्टम से 4 रॉकेट दागे गए। यह 358.5 किलोमीटर दूर लक्ष्य को भेद सकता है। यह टेस्ट उत्तर कोरिया की लंबी दूरी की सटीक हमले की क्षमता को दर्शाता है। जो इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी चुनौतियों के बावजूद काम कर सकती है।

इस टेस्ट के दौरान किम जोंग उन भी मौजूद रहे। सरकारी मीडिया ने इसे कोरियन पीपुल्स आर्मी की स्ट्रैटेजिक डिटरेंस बताया है। किम जोंग उन ने कहा कि इस लॉन्चर को विशेष हमले के लिए तैयार किया गया है। इसमें ऐसा ऑटोनॉमस प्रिसिजन गाइडेंस सिस्टम है। जो दुश्मन की रुकावट के बावजूद सटीक हमला सुनिश्चित करता है।

केएन-25 रॉकेट बेस्ड सिस्टम

केएन-25 को दुनिया का सबसे लंबी दूरी वाला रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम माना जाता है। चीन का पीसीएल-191 सिस्टम 500 किलोमीटर तक मारने में सक्षम है। वह बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल करता है। रॉकेट के रूप में उसकी अधिकतम रेंज 350 किलोमीटर है। इसके मुकाबले केएन-25 रॉकेट बेस्ड सिस्टम है। इसकी अधिकतम रेंज 400 किलोमीटर है।

4-सेल लॉन्चर वेरिएंट में तैनात

यह सिस्टम 6 सेल और 4 सेल लॉन्चर वेरिएंट में तैनात है। खासकर ट्रैक्ड लॉन्चर वाले वर्जन को पहाड़ी और जंगली इलाकों में इस्तेमाल को तैयार किया गया है। इससे इन्हें निशाना बनाना काफी मुश्किल होता है। उत्तर कोरिया के पास दुनिया की सबसे बड़ी आर्टिलरी फोर्स मानी जाती है। उसके रॉकेट सिस्टम पूरे कोरियाई प्रायद्वीप को कवर करने की क्षमता रखते हैं।

अमेरिका ने दे रखी थी चेतावनी

अमेरिकी की रिपोर्ट में कहा जा चुका है कि केएन-25 रॉकेट और मिसाइल के बीच की रेखा को धुंधला करता है। इसमें एडवांस एवियोनिक्स, इनर्शियल और सैटेलाइट गाइडेंस सिस्टम तथा आधुनिक एयरोडायनामिक डिजाइन शामिल हैं। इसकी लंबी रेंज उत्तर कोरिया को सियोल समेत बड़े इलाकों को निशाना बनाने की क्षमता देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के टेस्ट सिर्फ सैन्य अभ्यास नहीं है, बल्कि इस सिस्टम को रूस जैसे देशों को दिखाने की कोशिश हो सकता है। रूस हर साल उत्तर कोरिया से अरबों डॉलर का सैन्य साजो-सामान आयात कर रहा। इसमें आर्टिलरी सिस्टम भी शामिल हैं।

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