Nepal Protest Massive Public Outrage Against Balen Shah Government: नेपाल में एक बार फिर से आम जनता अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आई है। कुछ ही महीने पहले भारी बहुमत से चुनी गई बालेन शाह की सरकार का अब कड़ा विरोध हो रहा है। जनता के इस भारी गुस्से की सबसे बड़ी वजह प्रशासन का लगातार सख्त रवैया और अतिक्रमण हटाना है। पुलिस की ज्यादती और एक युवक की मौत ने लोगों के इस भारी गुस्से को और भी ज्यादा भड़का दिया है।
सरकार द्वारा भूमिहीन झुग्गीवासियों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के हटाए जाने से लोग नाराज हैं। 12 जुलाई को काठमांडू में सरकार के इस बेदखली फैसले के खिलाफ सैकड़ों लोगों ने विशाल प्रदर्शन किया। काठमांडू में बेदखली अभियान से 2,600 परिवारों के 15,000 से अधिक लोग बहुत बुरी तरह विस्थापित हुए हैं। सरकार ने नदी किनारे से बेघर हुए लोगों को मुआवजे के रूप में 15,000 रुपये देने का ऐलान किया है।
काठमांडू में पासपोर्ट विभाग के सामने गुरुवार को एक 25 वर्षीय युवक गणेश नेपाली ने खुद को आग लगा ली। पुलिस ने इस युवक की मोटरसाइकिल का पहिया लॉक कर दिया था जिसके बाद यह भयानक विवाद बहुत बढ़ गया। वह राइड-शेयरिंग का काम करता था और पुलिस से बहस के बाद उसने गुस्से में आकर यह खौफनाक कदम उठाया। अस्पताल में इलाज के दौरान 50 प्रतिशत जल चुके इस युवक की दर्दनाक मौत हो गई जिससे माहौल गरमा गया।
काठमांडू के एक अस्थायी आवास केंद्र में बाढ़ का पानी भरने के बाद करीब 150 लोगों को वहां से निकाला गया। जब जेन जेड के युवा कार्यकर्ता वहां हालात का जायजा लेने पहुंचे तो पुलिस ने उन पर बहुत ही कड़ा लाठीचार्ज किया। नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन कुमार थापा ने इस अमानवीय पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और रिहाई की मांग की। कोशी प्रांत में भी कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार के विरोध में धरना दे रहे 26 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने बालेन्द्र शाह की सरकार पर आम जनता की लगातार अनदेखी करने का बहुत गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह सरकार लोगों की जान से ज्यादा सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स की ज्यादा परवाह करती है। विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती 100 दिनों में सरकार ने जनता से किए गए अपने वादों में से केवल 16 फीसदी ही पूरे किए हैं। इसके अलावा निवेशकों का भरोसा टूटने से शेयर बाजार में 4.5 अरब नेपाली रुपये का भारी नुकसान भी लोगों को हुआ है।
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नेपाल में अतिक्रमण हटाने की इस भारी मुहिम से 325 परिवार अस्थायी आवास केंद्रों में अपना जीवन बिताने को मजबूर हैं। सरकार ने 2 जुलाई को आदेश देकर 6 जुलाई तक इन सभी अस्थायी आवास केंद्रों को खाली करने का कड़ा निर्देश दिया था। हालांकि गुरुवार तक भी वहां 60 से अधिक परिवार मौजूद थे जो अपने अधिकारों के लिए सरकार से लगातार लड़ रहे हैं। भूमिहीन लोगों के प्रति सरकार की इस भारी बेरुखी ने पूरे देश में एक बहुत बड़े राजनीतिक संकट को जन्म दे दिया है।