नेपाल त्रासदी पर बालेन शाह का एक्शन सौजन्य-IANS
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नेपाल बाढ़ में 734 से ज्यादा मौतें, 2498 लापता; सड़ते शवों से महामारी का खतरा, जानें क्या कर रही बालेन सरकार

Nepal Flood Epidemic Risk: नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद 734 से ज्यादा शव बरामद हुए हैं। 2,498 लोग अब भी लापता हैं। सड़ते शवों से महामारी फैलने का खतरा बढ़ गया है।

प्रिया जैस

Nepal Flood Death Toll: नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्यों के दौरान अब तक 734 से ज्यादा शव बरामद किए गए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मिले कई शवों की पहचान नहीं हो पाई है, जिससे उनका अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहा है और वे सड़ने लगे हैं।

शवों के तेजी से सड़ने और उससे निकलने वाली बदबू के कारण प्रभावित इलाकों में महामारी का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इस बीच, नेपाल सरकार बिना पहचान वाले शवों के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रही है। हर अज्ञात शव से DNA सैंपल सुरक्षित रखे जाएंगे।

किस जिले से कितने शव बरामद?

बुधवार को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्य जारी हैं। सुरक्षाकर्मी लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं, लेकिन प्रभावित इलाकों से शव मिलने से बड़े पैमाने पर संक्रमण और महामारी फैलने की गंभीर चिंता पैदा हो गई है। अकेले चितवन जिले में अब तक 259 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 74 पुरुष, 41 महिलाएं और 8 बच्चे (6 लड़के और 2 लड़कियां) शामिल हैं।

NDRRMA के अनुसार, अब तक नवलपरासी पूर्व से 184, नवलपरासी पश्चिम से 82 और गोरखा जिले से 58 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह नुवाकोट से 52, धादिंग से 50, तनहू से 36 और रसुवा से 13 शव मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस आपदा के बाद अब भी 2,498 लोग लापता हैं। इनमें 85 सुरक्षाकर्मी और 320 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

मुर्दाघर के साथ-साथ दफ्तरों में रखे जा रहे शव

बाढ़ में मिले शवों को जगह न होने के कारण मुर्दाघर के अलावा दफ्तरों में भी रखा जा रहा है। काठमांडू में नेपाल बाढ़ में लापता लोगों के परिवार और रिश्तेदार लगातार त्रिभुवन यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन के मुर्दाघर पहुंच रहे हैं, जहां पीड़ितों के शव लाए जा रहे हैं। रिश्तेदार अपने परिजनों की खोज में इधर-उधर भटक रहे है।

चितवन के मुख्य जिला अधिकारी गणेश अर्याल ने कहा कि जारी तलाशी अभियानों के बीच प्रशासन के लिए शवों का सुरक्षित प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है। स्थानीय अस्पताल में जगह की कमी के कारण शवों को एक सरकारी दफ्तर में रखा जा रहा है।

महामारी से निपटने की तैयारी

नेपाल बाढ़ के बाद मलबे और नदियों से बरामद ज्यादातर शव काफी हद तक सड़ चुके हैं और जिस कमरे में उन्हें पहचान के लिए रखा गया है, वहां से बदबू आ रही है। इससे इलाके में जानलेवा बीमारियों के फैलने का डर पैदा हो गया है।

महामारी के इस संभावित खतरे से निपटने और शवों के जल्द और सही तरीके से निपटान को सुनिश्चित करने के लिए, जिला प्रशासन अगले कदमों के बारे में केंद्र सरकार के साथ तालमेल बिठा रहा है।

बालेन सरकार का एक्शन प्लान

सड़ते हुए शवों से होने वाली महामारी को रोकने के लिए, नेपाल का गृह मंत्रालय संबंधित जिलों के साथ मिलकर शवों के तेजी से प्रबंधन के लिए एक रणनीति बना रहा है। गृह मंत्रालय की उप-प्रवक्ता रमा आचार्य सुबेदी के अनुसार, रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, चितवन और नवलपरासी जैसे प्रभावित जिलों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं।

बालेन शाह सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि शवों के अंतिम संस्कार और उन्हें संभालने का काम स्थानीय स्तर पर किया जाए या प्रक्रिया को करने के लिए उन्हें काठमांडू केंद्र भेजा जाए।

महामारी फैलने का खतरा

महामारी विज्ञान और रोग नियंत्रण विभाग ने सीमित संसाधनों के कारण महामारी फैलने की आशंका पर चिंता जताई है। विभाग के निदेशक डॉ. अनुज भट्टाचन ने कहा कि हालांकि शवों की पहचान होने तक उन्हें कोल्ड स्टोरेज में रखना जरूरी है, लेकिन बड़ी संख्या में शवों के अचानक आने से मौजूदा रेफ्रिजरेशन क्षमता कम पड़ रही है। इस समस्या से निपटने के लिए, धादिंग में मिले शवों को काठमांडू और पोखरा भेजा गया है ताकि उन्हें ठीक से संभाला जा सके और उस इलाके में बीमारी फैलने से रोका जा सके।

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