नेपाल-चीन बॉर्डर पर लैंडस्लाइड से बनी एक झील शुक्रवार को ओवरफ्लो होने लगी। दोनों तरफ के अधिकारियों ने यह जानकारी दी कि इससे बाढ़ से तबाह होने वाले इलाकों पर खतरा मंडराने लगा है और बचाव कार्यों को भी कुछ समय के लिए रोकना पड़ा है। नेपाल के नुवाकोट जिले में लोग नदी का जलस्तर बढ़ने के डर से सुरक्षित जगहों, जैसे त्रिशूली की पहाड़ियों की ओर चले गए।
नेपाल में आई भयानक आपदा के बाद, उत्तराखंड के नागरिकों के लिए राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) में हेल्पलाइन नंबर शुरू किए गए। अब तक SEOC को छह कॉल मिल चुकी हैं। आपदा प्रबंधन और पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मिली जानकारी गृह मंत्रालय (MHA) के साथ साझा कर दी गई है और SEOC के जरिए MHA के साथ लगातार बातचीत हो रही है।
मध्य नेपाल के प्रभावित जिलों में बचाव अभियान जारी है। नेपाल सेना और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों की टीमें फंसे हुए लोगों तक पहुंचने और जो लोग नहीं बच पाए, उनके शव निकालने के लिए तेजी से काम कर रही हैं।
नेपाल में मृतकों की संख्या 626 के पार पहुंच चुकी है। नेपाल के त्रिशूली में भारी बारिश के कारण मौसम खराब हो गया है और हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर पा रहा है, इसलिए बचाव अभियान को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, इसलिए एहतियात के तौर पर आस-पास के इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
अचानक आई बाढ़ में 600 से ज्यादा लोगों की मौत और लगभग 2,000 लोगों के लापता होने के बाद, बचाव कार्यों में स्थानीय अधिकारियों की मदद के लिए शनिवार को 11 सदस्यों वाली भारतीय टीम नेपाल पहुंची।
तिब्बत के इमरजेंसी मैनेजमेंट डिपार्टमेंट ने शनिवार को बताया कि नेपाल सीमा के पास तिब्बत में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई है और 554 लोग अभी भी लापता हैं। प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत टीमें अपनी कोशिशें तेज कर रही हैं।
नेपाल में ये तस्वीरें बेत्रावती के पास की हैं, जिसके आगे सड़क पूरी तरह बह गई है और नदी में मिल गई है। कई इलाकों तक बचाव दल भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। रसुवा के दूर-दराज और बुरी तरह प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर से निकाला जा रहा है।
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद अपनों की तलाश में परिवारों की बेचैनी बढ़ गई है। काठमांडू स्थित त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के इमरजेंसी गेट के बाहर लोग अपने लापता परिजनों की तस्वीरों और जानकारी वाले पोस्टर लगा रहे हैं।
नेपाल के नुवाकोट में फ्लैश फ्लड के बाद लापता लोगों के परिजन अपने अपनों की तलाश में सेना कैंप के बाहर जुटे हैं। हाथों में तस्वीरें लिए परिवार किसी भी सूचना का इंतजार कर रहे हैं और प्रशासन से जल्द मदद की उम्मीद लगाए हैं।
नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बेतरावती इलाके में भारी तबाही मचाई है। स्थानीय निवासी के मुताबिक, जिस जगह पहले मंदिर, बाजार और स्कूल हुआ करते थे, वहां अब कुछ भी नहीं बचा है। बाढ़ के दिन शिक्षकों ने सभी छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। इसके बावजूद पूरा इलाका पानी और मलबे में बह गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां कई लोगों की मौत हुई है, लेकिन मृतकों की सटीक संख्या अब तक स्पष्ट नहीं है।
नेपाल में बाढ़ के कारण गलछी ग्रामीण नगरपालिका में करीब 250 परिवार विस्थापित हुए हैं। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पूर्ण प्रसाद दुलाल ने बताया कि यह शुरुआती आंकड़ा है और आधिकारिक जानकारी शाम तक या शनिवार सुबह तक उपलब्ध होगी। प्रभावित परिवारों के लिए राहत पैकेज तैयार किए गए हैं। प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में जरूरतमंद लोगों के बीच राहत सामग्री वितरित कर रही हैं।
काठमांडू में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए राहत कैंप में नेपाल सेना के जवान खाना तैयार करने में मदद कर रहे हैं। आयुर्वेदिक अस्पताल में स्थापित इस कैंप में प्रभावित परिवारों को जरूरी सुविधाएं और राहत पहुंचाई जा रही है।
नेपाल में फ्लैश फ्लड से हुई तबाही के बीच वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने देवघाट क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित इलाकों में हुए नुकसान का जायजा लिया और मौके पर हालात की जानकारी ली। राहत एवं बचाव प्रयास जारी हैं।
नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नेपाल पुलिस के अनुसार, अब तक 669 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है, जबकि लापता लोगों की तलाश भी की जा रही है।
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण सेना हेलीकॉप्टरों की मदद से रेस्क्यू अभियान चला रही है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है, जबकि परिवार अब भी लापता परिजनों की तलाश में जुटे हैं। एक प्रभावित व्यक्ति ने बताया कि उसके बेटे और बेटी बिदुर कॉलोनी में फंसे हैं। स्वास्थ्य सहायक संजय कुमार यादव के अनुसार, हालात सामान्य नहीं हैं और कई लोग अब भी लापता हैं। सेना और मेडिकल टीमें लगातार बचाव कार्य में जुटी हैं।
नेपाल के नुवाकोट जिले के त्रिशूली इलाके में विनाशकारी बाढ़ के बाद ग्रामीण अपने घरों और दुकानों की ओर लौट रहे हैं। तिब्बत की सीमा से सटे इस क्षेत्र में बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। मिट्टी से सनी इमारतों और मलबे के बीच लोग बची हुई जरूरी चीजें तलाशकर सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं। बाढ़ के तेज बहाव ने कई इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे स्थानीय लोगों के सामने भारी नुकसान और मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद देवघाट के प्रभावित इलाकों में नेपाली सेना का खोज और बचाव अभियान जारी है। जवान बाढ़ के तेज बहाव में बह गए लोगों की तलाश कर रहे हैं। मिट्टी और मलबे में दबे पीड़ितों को खोजने के लिए राहत दल लगातार अभियान चला रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच जारी है।
नेपाल के त्रिशूली इलाके में फ्लैश फ्लड के बीच राहत और बचाव अभियान जारी है। नेपाली सेना के एक जवान के अनुसार, 29 अगस्त को शाम 4:45 बजे तक 418 नेपाली नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया। इनमें 173 महिलाएं और 245 पुरुष शामिल हैं। इसके अलावा 42 चीनी और 8 भारतीय नागरिकों का भी रेस्क्यू किया गया है।
नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद जारी राहत और बचाव अभियान में भारत की विशेष मदद का स्वागत किया गया है। नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने बताया कि सुरंग की खुदाई और रेस्क्यू के लिए विशेषज्ञ सहायता मांगी गई है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ लंबे सहयोग और भौगोलिक निकटता को देखते हुए मदद महत्वपूर्ण है। वाग्ले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संवाद जारी रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि फिलहाल जरूरतें पूरी हैं, लेकिन पुनर्निर्माण के लिए बड़े बजट पर अलग चर्चा होगी।