मोहम्मद मुइज्जू ने सर्जियो गौर से मिलने से इनकार किया (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरान के बाद इस छोटे से मुस्लिम देश ने US को दिखाई आंख, ट्रंप के विशेष दूत को घर बुलाकर मिलने से किया इनकार

Maldives Rift with US: Mohamed Muizzu ने अमेरिकी दूत सर्जियो गोर से मुलाकात रद्द कर कूटनीतिक हलचल मचा दी है। कर्ज के संकट और चुनाव में हार के बीच मालदीव का यह कदम भारी पड़ सकता है।

अक्षय साहू

Mohamed Muizzu Denies Meeting Sergio Gor: मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू (Mohamed Muizzu) ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत और दक्षिण-मध्य एशिया के लिए प्रतिनिधि सर्जियो गोर के साथ अपनी तय बैठक अंतिम समय पर रद्द कर दी। यह घटना 23 मार्च 2026 को हुई, जब गोर आधिकारिक दौरे पर राजधानी माले पहुंचे थे।

सर्जियो गोर ने मालदीव के विदेश और रक्षा मंत्रियों से मुलाकात की, लेकिन राष्ट्रपति मुइज्जू के साथ निर्धारित बैठक अचानक रद्द कर दी गई। इस फैसले ने कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। अमेरिकी दूत ने राजनयिक माध्यमों से बैठक पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया, जिसके जवाब में मालदीव की ओर से ‘बंद कमरे में निजी बैठक’ का प्रस्ताव रखा गया। हालांकि, गोर ने इसे स्वीकार नहीं किया और बिना राष्ट्रपति से मिले ही दिल्ली लौट गए।

इजरायल की नीतियों के आलोचक है मुइज्जू

सूत्रों के मुताबिक, बैठक रद्द होने के पीछे अंतरराष्ट्रीय राजनीति एक प्रमुख कारण हो सकती है। मोहम्मद मुइज्जू (Mohamed Muizzu) अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों के आलोचक माने जाते हैं। इसी वजह से उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि से दूरी बनाई। वहीं, माले प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रपति इन दिनों विदेशी दबाव से बचने के लिए सीमित मुलाकातें कर रहे हैं। इस घटनाक्रम के बीच मुइज्जू की घरेलू राजनीतिक स्थिति भी कमजोर होती दिख रही है। 4 अप्रैल को हुए स्थानीय चुनावों में उनकी पार्टी पीपुल्स नेशनल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) ने प्रमुख शहरों में मेयर पदों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा, राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव को भी जनता ने 60% बहुमत से खारिज कर दिया।

मालदीव में वित्तीय संकट गहराया

आर्थिक मोर्चे पर भी मालदीव दबाव में है। सरकार को हाल ही में भारी विदेशी कर्ज चुकाना पड़ा है, जिससे वित्तीय संकट गहरा गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए मालदीव ने भारत से 400 मिलियन डॉलर के कर्ज भुगतान के लिए अतिरिक्त समय मांगा है, जिस पर अभी फैसला बाकी है।

कूटनीतिक स्तर पर भी मुइज्जू सरकार के फैसले विवादों में हैं। भारत के साथ हुए समझौते से हटते हुए थिलाफुशी पोर्ट प्रोजेक्ट का काम चीन की कंपनी को सौंप दिया गया, जबकि भारत पहले से ‘ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट’ पर काम कर रहा है। ऐसे में मुइज्जू के फैसले क्षेत्रीय संतुलन और मालदीव के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर असर डाल सकते हैं।

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