Washington में लेबनान और इज़रायल के बीच दशकों बाद पहली सीधी वार्ता को मार्को रूबियो ने बताया ऐतिहासिक

Direct Talks: वॉशिंगटन (Washington) में लेबनान और इजरायल के बीच दशकों बाद पहली कूटनीतिक वार्ता हुई। मार्को रूबियो ने इसे ऐतिहासिक मौका बताया। दोनों देशों ने हिज़्बुल्लाह पर साझा चिंता व्यक्त की है।
Israel Lebanon First Direct Talks In Decades At Washington Historic Moment Says Marco Rubio On Peace
लेबनान और इज़रायल के बीच वार्ता (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Historic Middle East Peace Talks: अमेरिका के वॉशिंगटन (Washington) में लेबनान और इज़रायल ने दशकों बाद पहली बार आमने-सामने मध्य पूर्व की ऐतिहासिक शांति वार्ता की हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक को लेकर पूरी दुनिया की नज़रें बनी हुई हैं क्योंकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से युद्ध चल रहा था। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस खास बातचीत को एक बेहद ऐतिहासिक मौका करार दिया है। यह कूटनीतिक बैठक ऐसे समय में हुई है जब पूरे मध्य पूर्व में लगातार भारी तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है।

ऐतिहासिक बातचीत

Washington में यह बैठक दो घंटे से ज़्यादा समय तक चली जो दोनों देशों के बीच जुड़ने का एक दुर्लभ मौका था। अमेरिका में इज़रायल के राजदूत येचिएल लीटर ने इस लंबी चर्चा को बेहद सकारात्मक और अहम बताया है। लेबनान का प्रतिनिधित्व Washington में उसकी राजदूत नाडा हमादेह मोअवाद ने बहुत ही मजबूती के साथ किया।

हिज़्बुल्लाह पर चर्चा

दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के बढ़ते प्रभाव को लेकर अपनी साझा चिंता खुलकर व्यक्त की। इज़रायली राजदूत के अनुसार लेबनानी सरकार अब हिज़्बुल्लाह के कब्ज़े में नहीं रहना चाहती है। इस बातचीत से यह साफ़ हो गया है कि दोनों पक्ष हिज़्बुल्लाह को लेकर एक ही तरफ खड़े हैं।

कमज़ोर होता ईरान

राजदूत लाइटर ने कहा कि इस समय ईरान पहले के मुकाबले काफी कमज़ोर पड़ गया है। इसका सीधा असर हिज़्बुल्लाह पर भी पड़ा है जो अब काफी हद तक कमज़ोर हो चुका है। इन दोनों ताक़तों के कमज़ोर होने से लेबनान को आज़ाद कराने का एक नया रास्ता खुलता हुआ दिखाई दे रहा है।

ज़मीनी हक़ीक़त

कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर अभी भी हालात काफी तनावपूर्ण और चिंताजनक बने हुए हैं। हिज़्बुल्लाह ने इस पूरी वार्ता का कड़ा विरोध किया है और इसमें उसका कोई भी प्रतिनिधित्व शामिल नहीं था। वह लगातार उत्तरी इज़रायल पर हमले कर रहा है जबकि इज़रायली सेना दक्षिणी लेबनान में अपना अभियान चला रही है।

आगे की चुनौतियां

लेबनानी सेना हिज़्बुल्लाह को पूरी तरह से निहत्था करने में अब तक कामयाब नहीं हो पाई है। इस चरमपंथी समूह के पास पूरे लेबनान में आज भी काफी सैन्य ताक़त और बड़ा राजनीतिक प्रभाव मौजूद है। इस वार्ता में समूह की अनुपस्थिति किसी भी स्थायी समझौते के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

शांति की उम्मीद

भले ही यह बातचीत सफल रही हो लेकिन रूबियो ने किसी तत्काल सफलता की उम्मीद से पूरी तरह इनकार किया है। इज़रायल और हिज़्बुल्लाह के बीच एक महीने से ज़्यादा वक्त तक चली जंग ने गहरे घाव दिए हैं। फिर भी दशकों से युद्ध की स्थिति में रहे इन देशों का बात करना शांति की ओर पहला मजबूत कदम है।

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