Mojtaba Khamenei Warns President Masoud Over His Resignation: अमेरिका और इजरायल के साथ जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा घमासान छिड़ गया है। इजरायली मीडिया के अनुसार, देश के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को सीधे तौर पर एक अंतिम चेतावनी दी है। मोजतबा ने राष्ट्रपति से कहा है कि वे भविष्य में मोलभाव के लिए इस्तीफे का नाटक न करें। इस बड़े संकट के बीच ईरान में मोजतबा खामेनेई ने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के इस्तीफे का नया मोर्चा खुल गया है।
दरअसल ईरानी राष्ट्रपति मसूद ने पहले कई फैसलों पर विरोध जताने के लिए मई महीने में पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। लेकिन अब सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने इस राजनीतिक ब्लैकमेलिंग को रोकने के लिए राष्ट्रपति को स्पष्ट कह दिया है कि अगर वे अब इस्तीफा देंगे तो उसे तुरंत स्वीकार कर लिया जाएगा। इस चेतावनी के बाद से ही तेहरान के सत्ता गलियारों में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल पूरी तरह से बन चुका है।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान इस बात से नाराज हैं कि उनकी सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के फैसलों में बहुत ही सीमित भूमिका रह गई है। सुप्रीम लीडर मोजतबा लगातार सेना IRGC के कमांडर अहमद वाहिदी को अमेरिका और क्षेत्रीय मुद्दों पर पूरा समर्थन दे रहे हैं। अहमद वाहिदी का रुख बेहद कट्टर है जिसे तेहरान के नीतिगत फैसलों में सर्वाधिक महत्व दिया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए बड़े हमले में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी। उनके निधन के बाद ही मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया था। लेकिन तब से लेकर आज तक मोजतबा को कहीं भी सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA और इजरायली मोसाद लगातार उनकी तलाश में जुटी हैं, जिस वजह से मोजतबा किसी भी डिजिटल सिग्नल वाले उपकरण का उपयोग नहीं कर रहे हैं। वे न तो मोबाइल फोन छूते हैं और न ही लैपटॉप या रेडियो का इस्तेमाल करते हैं। पिता की मौत वाले एयरस्ट्राइक में उनके चेहरे पर भी कुछ गंभीर जख्म आए थे, जिससे उनका चेहरा खराब हो गया है।
सुप्रीम लीडर के पिता अली खामेनेई को निशाना बनाने के लिए अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी और इजरायल की यूनिट 8200 ने मिलकर तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक किया था। इसके जरिए उनके सुरक्षा काफिले की गाड़ियों की पहचान की गई थी, जिसके बाद हुए हवाई हमले में वे मारे गए थे। इसी वजह से मोजतबा सैटेलाइट ट्रैकिंग के डर से अंडरग्राउंड जीवन जी रहे हैं।