ईरान-ओमान के बीच Hormuz Strait पर फीस वसूलने की डील, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा असर

Hormuz Strait Fees: ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से फीस' वसूलने की तैयारी में हैं, जिससे अमेरिका चिंतित है और तेल की कीमतें बढ़ने से भारत की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं।
Iran And Oman Close To Shipping Agreement At Hormuz Strait
होर्मुज स्ट्रेट ईरान-ओमान समझौताफोटो (सोर्स- AI जनरेटेड)
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Iran And Oman Close To Shipping Agreement At Hormuz Strait: ईरान और ओमान ने होर्मुज स्ट्रेट के समुद्री यातायात को नियंत्रित करने और जहाजों से शुल्क वसूलने के लिए एक बड़ा द्विपक्षीय समझौता करने की तैयारी कर ली है। इस रणनीतिक समझौते के तहत दोनों पड़ोसी देश इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने वाले तमाम व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और आपातकालीन सहायता सुनिश्चित करेंगे। इसी विषय पर दोनों देशों के बीच हो रही चर्चा में फीस वसूलने को लेकर सहमति बनने की खबर है।

इस रणनीतिक समझौते के लागू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी जहाजों को नियमित रूप से सुरक्षा शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस शुल्क से होने वाली कुल कमाई को ईरान और ओमान के बीच बराबर-बराबर यानी पचास-पचास प्रतिशत के अनुपात में बांटा जाएगा। अमेरिका ने इस नए समझौते का कड़ा विरोध किया है और इसे स्वतंत्र नौवहन के अधिकारों के खिलाफ बताया है।

नए नौवहन मार्ग का निर्धारण

इस नए अरेंजमेंट के तहत फारस की खाड़ी से आने वाले जहाजों को ईरान के तट के करीब मौजूद उत्तरी शिपिंग लेन से गुजरना होगा। वहीं अरब सागर से निकलने वाले जहाजों को ओमान के करीब स्थित दक्षिणी शिपिंग लेन से निकाला जाएगा। यह नई योजना होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान और ओमान के संप्रभु अधिकारों को स्थापित कर देगी।

ईरान और ओमान का कहना है कि यह कोई औपचारिक टैक्स नहीं है, बल्कि इसे एक 'सर्विस फीस' के तौर पर लिया जा रहा है। इस शुल्क से मिलने वाली राशि का उपयोग मुख्य रूप से समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए किया जाएगा। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह इस प्रकार के किसी भी शुल्क को अवैध मानता है।

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अमेरिका और भारत की बढ़ी चिंताएं

भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट पर सर्विस फीस वसूलने की ईरान-ओमान की यह योजना एक बड़ा झटका साबित हो सकती है। भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी ऊर्जा के लिए इस समुद्री मार्ग पर बहुत अधिक निर्भर है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण जलमार्ग से कच्चे तेल और गैस के रूप में आयात करता है। इसके अलावा खाड़ी देशों के साथ भारत का व्यापार इसी मार्ग पर टिका है।

अगर इस मार्ग पर सुरक्षा शुल्क लागू होता है तो इससे भारत के ऊर्जा आयात की लागत में भारी वृद्धि हो सकती है। इसका सीधा असर घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे देश में महंगाई बढ़ने की आशंका है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी दी है कि ऐसे समझौतों से दुनिया के अन्य हिस्सों में भी अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को नियंत्रित करने की एक खतरनाक मिसाल कायम होगी।

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