शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर (सोर्स- IANS) 
विदेश

आंतकी गुटों को संरक्षण दे रहा पाकिस्तान, दक्षिण एशिया में बढ़ सकती है अस्थिरता; MEMRI की रिपोर्ट में बड़ा दावा

Pakistan News: एमईएमआरआई की रिपोर्ट में पाकिस्तान की सेना पर आतंकवाादी संगठन को संरक्षण देने और तालिबान पर दबाव बनाने के लिए आतंकियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है।

अमन मौर्या

MEMRI Report On Pakistan: पाकिस्तान की सेना पर आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी/आईएसआईएस-के) को पनाह देने और फिर आतंकवाद विरोधी अभियान के नाम पर अफगानिस्तान में हवाई हमले करने के आरोप लगाए गए हैं। अमेरिका स्थित मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (एमईएमआरआई) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाईयां तालिबान सरकार पर दबाव बनाने और पश्चिमी देशों के सामने अपनी सख्त छवि पेश करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं।

अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच ड्रोन गतिविधियां तेज

रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून 2026 को अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पार ड्रोन गतिविधियों की खबरें सामने आई थीं। ये गतिविधियां कथित रूप से आईएसकेपी के ठिकानों को लेकर थीं। हाल के वर्षों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं और पाकिस्तान कथित तौर पर क्षेत्र में तालिबान के खिलाफ दबाव बनाने के लिए अन्य आतंकी नेटवर्कों का इस्तेमाल कर सकता है।

एमईएमआरआई रिपोर्ट में दावा किया गया कि पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था और आईएसकेपी के बीच कथित संबंध दक्षिण एशिया में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं। रिपोर्ट ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान दशकों से भारत और अफगानिस्तान के संदर्भ में आतंकवादी समूहों के इस्तेमाल की रणनीति अपनाता रहा है।

तालिबान और बलूच विद्रोही समूहों पर दबाव की रणनीति

रिपोर्ट में कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्य संकेत देते हैं कि पाकिस्तान आईएसकेपी को वैचारिक समर्थन के बजाय रणनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर सकता है, ताकि अफगान तालिबान और बलूच विद्रोही समूहों पर दबाव बनाया जा सके। पाकिस्तान की पोल खोलती रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2021 में तालिबान की अफगानिस्तान की सत्ता में वापसी के बाद पाकिस्तान और तालिबान के रिश्तों में गिरावट आई है। सीमा पर झड़पों में वृद्धि हुई है और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया है।

बलूचों ने भी हमले किए तेज

रिपोर्ट में दावा किया गया कि कतर, तुर्की और चीन जैसे देशों की मध्यस्थता के प्रयास भी दोनों देशों के बीच तनाव कम करने में सफल नहीं रहे हैं। बलूच सशस्त्र समूहों ने बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों और प्रमुख परियोजनाओं, खासकर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) से जुड़े ठिकानों पर हमले बढ़ाए हैं। इसके अनुसार, चीनी नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर बीजिंग ने पाकिस्तान को अपनी फिक्र से रूबरू कराया है, जिससे पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर पर दबाव बढ़ा है।

पश्चिमी देशों से की गई खास अपील

रिपोर्ट ने दावा किया कि पाकिस्तान ने बढ़ते उग्रवाद के जवाब में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में कड़े सुरक्षा उपाय अपनाए हैं, लेकिन इससे स्थानीय समुदायों में असंतोष बढ़ सकता है। आईएसकेपी के बढ़ते दखल से आगाह करते हुए रिपोर्ट में पश्चिमी देशों से अपील की गई कि पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य और आर्थिक सहायता को आईएसकेपी नेटवर्क के खिलाफ स्वतंत्र निगरानी वाली ठोस कार्रवाई से जोड़ें, ताकि क्षेत्रीय अस्थिरता और संभावित वैश्विक सुरक्षा जोखिमों को नियंत्रित किया जा सके।

एजेंसी इनपुट के साथ...

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