Japan Muslim Population: जापान (Japan) में इन दिनों मुस्लिम आबादी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी को लेकर बवाल मचा हुआ है। देश के कई प्रांतों में इसे लेकर लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा जापान में धार्मिक ढांचे में उल्लेखनीय वृद्धि भी दर्ज की गई है। इसी पृष्ठभूमि में फुजीसावा शहर में प्रस्तावित एक मस्जिद को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बड़ी तादाद में स्थानीय लोग इस मस्जिद के खिलाफ प्रदर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नई बन रही मस्जिद का आकार आसपास मौजूद पारंपरिक शिंतो मंदिरों से बड़ा है, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान प्रभावित हो सकती है। प्रदर्शनकारियों ने इसे स्थानीय परंपराओं के लिए “उकसावे” के रूप में भी बताया है। इस परियोजना को लेकर हुई सार्वजनिक बैठकों में कई बार तनावपूर्ण स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
विवाद के बीच ‘फुजीसावा मस्जिद’ परियोजना से जुड़े प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि वे जापान के कानूनों और स्थानीय नियमों का पूरी तरह पालन करेंगे और देश की संस्कृति का सम्मान करते हैं। इसके बावजूद स्थानीय समुदाय की चिंताएं पूरी तरह कम नहीं हुई हैं।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब जापान (Japan) में मुस्लिम आबादी में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। वासेदा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एमेरिटस हिरोफुमी तानादा के अनुमान के अनुसार, 2024 के अंत तक जापान में मुस्लिम आबादी लगभग 4.2 लाख तक पहुंच चुकी है, जबकि 2010 में यह संख्या लगभग 1.1 लाख थी। इनमें से अधिकांश विदेशी नागरिक हैं, जो काम या पढ़ाई के लिए जापान आए हैं।
इसी अवधि में जापान में मस्जिदों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। 2008 में जहां लगभग 50 मस्जिदें थीं, वहीं 2025 तक यह संख्या 160 से अधिक हो चुकी है। टोक्यो, ओसाका, नागोया और योकोहामा जैसे बड़े शहरों में मुस्लिम समुदाय अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव जापान की बदलती जनसांख्यिकी और आर्थिक जरूरतों से जुड़ा है। देश में घटती जन्मदर और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के कारण सरकार ने विदेशी श्रमिकों के लिए नीतियां आसान की हैं। नतीजतन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश और ईरान जैसे देशों से बड़ी संख्या में प्रवासी जापान पहुंचे हैं, जो मुख्य रूप से नर्सिंग, केयरगिविंग और तकनीकी क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
संवैधानिक रूप से जापान में धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित है, और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यदि मस्जिद परियोजना सभी नियमों और ज़ोनिंग कानूनों का पालन करती है, तो इसे रोकना कानूनी रूप से संभव नहीं होगा। वहीं यह मुद्दा अब सिर्फ एक मस्जिद निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जापान में इमिग्रेशन, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक बदलावों पर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा बन चुका है।