Jaishankar Bangladesh High Commissioner Meeting: दक्षिण एशियाई कूटनीति के केंद्र में एक बार फिर भारत-बांग्लादेश संबंध आ गए हैं। शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्री (EAM) एस जयशंकर ने नई दिल्ली में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्ला के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाना और भविष्य के सहयोग की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा करना था। जयशंकर ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा करते हुए स्पष्ट किया कि पूरी बातचीत आपसी संबंधों को और आगे बढ़ाने पर केंद्रित रही।
इस बैठक से ठीक एक दिन पहले, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक साप्ताहिक ब्रीफिंग में यह स्पष्ट किया था कि भारत अपने पड़ोसियों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों ने भारत से अपनी ऊर्जा आपूर्ति आवश्यकताओं के लिए अनुरोध किया है। विशेष रूप से बांग्लादेश के संदर्भ में, जायसवाल ने उल्लेख किया कि भारत वर्ष 2007 से ही विभिन्न परिवहन माध्यमों के जरिए वहां डीजल की निरंतर आपूर्ति कर रहा है और यह प्रक्रिया वर्तमान में भी जारी है।
भारत अपनी घरेलू जरूरतों, रिफाइनिंग क्षमता और डीजल की उपलब्धता को संतुलित करते हुए अपने पड़ोसी देशों की सहायता कर रहा है। हालांकि, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं, जिससे एलपीजी (LPG) की आपूर्ति वर्तमान में चिंता का विषय बनी हुई है। भारत सरकार फिलहाल अपने घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है, जिसके बाद ही व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए एलपीजी आपूर्ति के प्रबंधन पर निर्णय लिया जाएगा।
कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की सक्रियता केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। इसी महीने की शुरुआत में, बांग्लादेश में नियुक्त भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने वहां की नवनिर्मित 'तारिक रहमान' के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार के प्रमुख मंत्रियों के साथ बैठकों का एक महत्वपूर्ण दौर शुरू किया। वर्मा ने स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर से मुलाकात कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कृषि सहकारिता जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को तलाशा।
इन बैठकों के दौरान दोनों पक्ष ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास, कृषि सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण और जमीनी स्तर पर वित्तीय सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय जुड़ाव बढ़ाने पर सहमत हुए। भारतीय उच्चायोग ने स्पष्ट किया कि भारत-बांग्लादेश संबंध पूरी तरह से जन-केंद्रित हैं और भारत आपसी हित तथा पारस्परिक लाभ के आधार पर एक सकारात्मक और रचनात्मक साझेदारी के लिए तैयार है।
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भारत और बांग्लादेश के रिश्तों की जड़ें 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान दिए गए साझा बलिदानों और मजबूत ऐतिहासिक बंधनों में निहित हैं। प्रणय वर्मा ने बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध मामलों के मंत्री हफीज उद्दीन अहमद के साथ बैठक में इन गौरवशाली ऐतिहासिक संबंधों की पुष्टि की। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आपसी सम्मान और विश्वास के आधार पर लोगों से लोगों के संबंधों को और अधिक गहरा करने के लिए मिलकर काम करना आवश्यक है। यह सक्रियता दर्शाती है कि बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद, भारत और बांग्लादेश अपने रणनीतिक और ऐतिहासिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए संकल्पित हैं।