Israel Lebanon Peace Deal: मीडिल ईस्ट में महीनों से जारी तनाव के बीच बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। इजरायल और हिजबुल्लाह लड़ाकों के बीच जारी जंग को खत्म करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए इजरायल और लेबनान ने शांति समझौते की रूपरेखा पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
शुक्रवार को वाशिंगटन में अमेरिका की मध्यस्थता में हुई कई दिनों की सघन वार्ता के बाद यह महत्वपूर्ण समझौता संभव हो सका है। इसे क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने की दिशा में पहला और सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक दस्तावेज पर वाशिंगटन स्थित विदेश मंत्रालय में हस्ताक्षर किए गए। अमेरिका में लेबनान की राजदूत नाडा हमादेह मोवाद और उनके इजरायली समकक्ष येचियल लाइटर ने अमेरिका की मौजूदगी में इस त्रिपक्षीय दस्तावेज पर अपनी सहमति जताई।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह उस लंबी प्रक्रिया की शुरुआत है जो आने वाले समय में एक पूर्ण शांति संधि का रूप ले सकती है। अमेरिका इस पूरे घटनाक्रम में एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस मौके पर कहा कि आज एक ऐसे सफर की शुरुआत हुई है, जो निस्संदेह काफी मुश्किल और चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन शांति के लिए यह बेहद जरूरी है। इस पूरी वार्ता के दौरान लेबनानी राजदूत नाडा हमादेह के रुख की काफी प्रशंसा की गई। हालांकि, अधिकारियों ने फिलहाल इस फ्रेमवर्क डील की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है, और यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि इसकी शर्तें 16 अप्रैल के पिछले संघर्ष विराम समझौते से कितनी अलग या प्रभावी होंगी।
लेबनानी राजदूत हमादेह ने इस समझौते को लेबनान के लिए एक बड़ी जीत बताया है। उनके अनुसार, यह फ्रेमवर्क लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बहाल करने की दिशा में पहला कदम है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे लड़ाई हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी और लेबनानी जनता को फिर से शांति, सुरक्षा और खुशहाली के साथ जीने का मौका मिलेगा। वहीं, इजरायली राजदूत लाइटर ने जोर देकर कहा कि इस पूरी कवायद का अंतिम और एकमात्र लक्ष्य दोनों पड़ोसी देशों के बीच स्थायी शांति स्थापित करना है।
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हालांकि, इस शांति समझौते की घोषणा के चंद घंटों बाद ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक सख्त बयान जारी कर दुनिया को हैरत में डाल दिया। नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक हिजबुल्ला का पूरी तरह से निरस्त्रीकरण नहीं हो जाता, तब तक इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में तैनात रहेगी।