India 6G Network Launch 2030: सरकार का दावा है कि 2030 तक देश 6जी का इस्तेमाल कर रहा होगा । यही नहीं इस तकनीक के क्षेत्र में उसकी तेज तैयारी उसे वैश्विक नेतृत्व दिलाएगी । इस संदर्भ में 'भारत 6 जी अलायंस' के गठन और 2030 तक इसके विकास व क्रियान्वयन से संबंधित जो महत्वाकांक्षी स्पेक्ट्रम रोडमैप जारी किया है, वह वाकई उत्साहवर्धक है । उसकी यह पहल दिखाती है कि अब हम वैश्विक मानकों और पेटेंट को आकार देने वाले एक वैश्विक अगुआ देश के तौर उभरना चाहते हैं ।
भले ही चीन ने प्रयोगात्मक 6G उपग्रह कक्षा में स्थापित कर लिए, लेकिन दुनिया का कोई देश अभी व्यावसायिक स्तर पर 6G सेवा शुरू नहीं कर सका है । अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया, जापान, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन जैसे देश 6G के शोध, पेटेंट और मानक तय करने की दौड़ में हैं । सिंगापुर, वियतनाम, स्वीडन, फिनलैंड जैसे तमाम छोटे देशों में भी 6 जी को लेकर कवायद जारी है । ऐसे में भारत की सबसे आगे निकलने की चाहत स्वाभाविक है । क्योंकि भारत के पास इसकी इच्छाशक्ति ही नहीं क्षमता और कुशलता भी है । देश की बड़ी आबादी आज भी 4जी का उपयोग कर रही है ।
सच यह है कि अभी 5जी भी हम पूरी तरह लागू नहीं कर सके हैं । 4G की रफ्तार कुछ देशों के 3जी से भी बहुत धीमी है । 5G नेटवर्क की डाउनलोड स्पीड भले ही आदर्श परिस्थितियों में बेहतर दिखे, लेकिन नेटवर्क की निरंतरता तथा लेटेंसी और वास्तविक इनडोर कवरेज में यह कई विकसित देशों के मुकाबले मीलों पीछे है । विकसित देशों में 5G का इस्तेमाल केवल स्मार्टफोन पर वीडियो चलाने के लिए नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, रोबोटिक सर्जरी और स्मार्ट सिटीज के रियल ।टाइम डाटा मैनेजमेंट के लिए हो रहा है, जबकि यहां नेटवर्क की निरंतरता संदिग्ध होने से ऐसे प्रयोग आशंकाग्रस्त रहते हैं ।
ऐसे में 5जी की रफ्तार, नेटवर्क निरंतरता सुनिश्चित करने की बजाय 6G की ओर जाने की ललक क्यों? क्या 6G से सामान्य इंटरनेट उपभोक्ता, जो इसका इस्तेमाल बहुधा OTT प्लेटफार्म, मनोरंजन, सोशल मीडिया, समाचार, संदेशों का आदान ।प्रदान अथवा इसी तरह के साधारण कामों के लिए करता है, उसको कोई खास लाभ होगा? 6जी, आमजन को 4जी या 5जी के मुकाबले सस्ती पड़ेगी अथवा महंगी? इस पर किसी किसी खास प्रोवाइडर का एकाधिकार तो नहीं हो जाएगा और क्या इसके कुछ नुकसान भी हैं?
दूरसंचार में नई पीढ़ी को विकसित होने में तकरीबन दशक लग जाता है, इसलिए 6G पर तैयारी अभी तेज करना जरूरी है, ताकि 2030 में जब पूरी दुनिया 6G पर शिफ्ट हो रही हो भारत फिर से विदेशी कंपनियों के उपकरणों, पेटेंटों और बौद्धिक संपदा पर निर्भर न रहे, जैसा कि 2G, 3G और 4G के दौर में हुआ था । भविष्य का स्मार्ट उद्योग, स्वचालित वाहन, दूरस्थ शल्य चिकित्सा, डिजिटल ट्विन, रोबोटिक्स तथा रक्षा प्रणालियां इसी पर आधारित होंगी, इसलिए भी हमें 6जी की तैयारी आज ही करनी होगी । दरअसल 6 जी का सबसे बड़ा ग्राहक आम नागरिक नहीं, बल्कि उद्योग, अस्पताल, परिवहन, रक्षा, स्मार्ट शहर और स्वचालित उत्पादन प्रणाली होंगे । एक मिली सेकंड से भी कम विलंबता, टेराबिट प्रति सेकंड तक की संभावित गति और एआई आधारित नेटवर्क प्रबंधन जैसे गुण औद्योगिक उपयोगों के लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं ।
-लेख संजय श्रीवास्तव द्वारा