पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग।  
विदेश

भारत के लिए बड़ी साजिश रच रहा चीन? बड़े संकट का मिला इशारा, क्या है शी जिनपिंग का शुद्धीकरण अभियान?

China and India: चीनी राष्ट्रपति द्वारा सेना और पार्टी के अंदर विरोधियों को हटाने के अभियान ने भारत की सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन के लिए चुनौतियां पैदा कर दी हैं। यह बड़ा संकट बन सकता है।

रंजन कुमार

China and India News: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में बड़ा और रहस्यमयी शुद्धीकरण अभियान चल रहा। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग विरोधियों और भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे टॉप अफसरों को रास्ते से हटा रहे हैं। वैसे, चीन इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग कह रहा, लेकिन ग्लोबल पॉलिटिकल एक्सपर्ट का मानना है कि यह सत्ता को केंद्रित करने की कोशिश है। चीन की यह आंतरिक उठा-पटक भारत के लिए केवल पड़ोसी देश का आंतरिक मामला नहीं, बल्कि सीधे तौर पर हमारी सीमाओं और अर्थव्यवस्था से जुड़ा मामला है।

हाल में चीनी रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और रॉकेट फोर्स के शीर्ष जनरलों का गायब होना या उन्हें पद से हटाना बड़े संकट की ओर इशारा कर रहा। शी जिनपिंग का यह अभियान अब सेना में गहराई तक पहुंच गया है। इसका मकसद उन अफसरों को हटाना है, जो जिनपिंग की आक्रामक विस्तारवादी नीति पर सवाल उठा सकते या जिनका झुकाव पश्चिमी देशों की ओर है।

क्या है इसका मतलब ?

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कई साल से है। चीन की सेना में चल रही इस उठा-पटक का भारत पर सीधा असर पड़ता है। जब कोई तानाशाह घरेलू स्तर पर असुरक्षित महसूस करता है, वह अक्सर राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने को सीमाओं पर तनाव पैदा करता है। भारत को सावधान रहना होगा कि जिनपिंग घरेलू कमियों को छिपाने के लिए एलएसी पर नया दुस्साहस न करें। चीन की रॉकेट फोर्स और वेस्टर्न थिएटर कमांड में अधिकारियों का बदलना भारत की खुफिया एजेंसियों के लिए चुनौती है। नए कमांडरों की मानसिकता और युद्ध कौशल को समझना अब भारत के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए।

आर्थिक कनेक्शन

चीन की आंतरिक अस्थिरता का प्रभाव उसकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा। कई विदेशी कंपनियां अब चीन से कारोबार समेटकर चीन प्लस वन रणनीति के तहत भारत का रुख कर रहीं। चीन में राजनीतिक अस्थिरता के चलते वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो रही। भारत के लिए यह सुनहरा मौका है कि वह खुद को स्थिर और भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में पेश करे। जिनपिंग का शुद्धिकरण अभियान तकनीक और चिप निर्माण क्षेत्र तक फैला है। भारत अपनी सेमीकंडक्टर नीति के माध्यम से उन निवेशकों को आकर्षित कर सकता है, जो चीन के सख्त नियमों से परेशान हैं।

क्या मानते हैं भारतीय रक्षा विशेषज्ञ?

भारतीय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की उठा-पटक को हमें हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक अस्थिर चीन भारत के लिए और अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। शी जिनपिंग अब किसी प्रकार के असंतोष को बर्दाश्त नहीं कर रहे। मतलब भविष्य में चीन की विदेश नीति और अधिक कठोर और अप्रत्याशित होगी।

चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की होगी बड़ी बैठक

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल जुलाई या अगस्त में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की बड़ी बैठक होनी है। उसमें जिनपिंग अपनी टीम को पूरी तरह से वफादारों से भर देंगे। भारत अपनी सीमा सुरक्षा को और मजबूत कर रहा और चीन पर अपनी आयात निर्भरता कम करने के लिए कड़े कदम उठा रहा है।

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