Iraq Islamic Resistance Donald Trump $10 Million Reward: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। इराक के इस्लामिक रेजिस्टेंट संगठन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने के लिए 10 मिलियन डॉलर के इनाम की घोषणा की है।
संगठन ने एक आधिकारिक बयान जारी कर ट्रंप को 'अहंकारी और आक्रामक' करार दिया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव अपने चरम पर है और पूरे क्षेत्र में महायुद्ध का खतरा मंडरा रहा है।
इराकी मिलिटेंट संगठन ने अपने बयान की शुरुआत धार्मिक शब्दों से करते हुए कहा कि वे उन लोगों को चैन से नहीं बैठने देंगे जिन्होंने इराकियों का खून बहाया है। संगठन के प्रवक्ता ने कहा कि जिसने भी हमारे बच्चों, विद्वानों और नेताओं को निशाना बनाया या हमारे लोगों को बेघर किया, दुनिया के आजाद लोग उसे सुकून से जीने नहीं देंगे।
बयान में आगे कसम खाते हुए कहा गया है कि हमलावरों के सिंहासनों को तब तक हिलाया जाएगा जब तक कि अत्याचारी के किले ढह नहीं जाते।
इस इनाम के पीछे का मुख्य कारण जनवरी 2020 में हुए अमेरिकी ड्रोन हमले को माना जा रहा है। संगठन ने अपने बयान में शहीद कमांडर हाजी कासिम सुलेमानी और हाजी अबू महदी अल-मुहंदिस का जिक्र किया। उनका कहना है कि ट्रंप ने अपने अहंकार में इन कमांडरों को निशाना बनाया था और इस नापाक कदम का जवाब प्रतिरोध की ताकतों द्वारा हमेशा गर्व और सम्मान के साथ दिया जाएगा। गौरतलब है कि सुलेमानी की मौत के बाद से ही ईरान समर्थित संगठन अमेरिका से बदला लेने की फिराक में रहे हैं।
अमेरिकी हवाई हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पूर्व में हुए समझौतों को लगभग खत्म कर दिया है। ईरानी अधिकारियों के दावे के मुताबिक, हाल के अमेरिकी हमलों में अब तक 35 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और नौसैनिक नाकाबंदी ने इस आग में घी डालने का काम किया है।
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इस पूरे घटनाक्रम पर व्हाइट हाउस ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य में आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेंगे। व्हाइट हाउस का दावा है कि ईरान लगातार बातचीत की कोशिश कर रहा है क्योंकि अमेरिकी सेना की कार्रवाई से उसे भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि, इराकी संगठन द्वारा इनाम की घोषणा ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है और कूटनीतिक प्रयासों को बड़ा झटका दिया है।