Iraq US Base Attack Iran: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच शुक्रवार को उत्तरी इराक के इरबिल शहर में एक बड़ा सैन्य हमला हुआ है। यहां अमेरिकी सेना की मौजूदगी वाले एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने के पास सिलसिलेवार सात जोरदार धमाके सुने गए।
इन धमाकों के बाद इलाके में भीषण आग लग गई और आसमान में काले धुएं का गुबार साफ देखा गया। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने 13 रातों से चले आ रहे सैन्य अभियानों को समाप्त करने की घोषणा की थी।
जानकारी के अनुसार, स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 9:30 बजे इरबिल शहर के अर्ध-स्वायत्त कुर्द क्षेत्र में धमाकों की गूंज सुनाई दी। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि विस्फोट इतने शक्तिशाली थे कि उनकी आवाज दूर तक सुनी गई। हमले के तुरंत बाद सैन्य अड्डे और उसके आसपास के हिस्सों से आग की लपटें उठती देखी गईं। फिलहाल इस हमले में हुए नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
इस ताजा हमले को अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव का हिस्सा माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच विवाद की मुख्य वजह होर्मुज पर नियंत्रण हासिल करना है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया के कुल तेल और गैस परिवहन का पांचवां हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है।
अमेरिकी केंद्रीय कमान के मुताबिक, हालिया सैन्य कार्रवाई ईरान की उन क्षमताओं को कम करने के लिए की गई थी, जिसके जरिए वह इस व्यापारिक मार्ग से गुजरने वाले जहाजों और नागरिक नाविकों को धमकाता रहा है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस जंग का असर अब पड़ोसी देशों पर भी दिखने लगा है। खाड़ी देशों में सायरन की आवाजें आम हो गई हैं। बहरीन ने अपने नागरिकों को संभावित गोलाबारी से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी जारी की है।
वहीं, लाल सागर में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। हाल ही में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
क्षेत्र में गहराते संकट के बीच इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने शांति की पहल तेज कर दी है। गुरुवार को अल-जैदी तेहरान पहुंचे, जहां उन्होंने ईरानी नेतृत्व से बातचीत कर तनाव कम करने की अपील की। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अल-जैदी ने वादा किया है कि वे इराकी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी हमले के लिए नहीं होने देंगे।
गौरतलब है कि अल-जैदी के संबंध वाशिंगटन और तेहरान, दोनों से बेहतर माने जाते हैं और उन्होंने इस महीने की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाकात की थी।