ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमला: हिंद महासागर में डूबा आइरिस डेना, तेहरान ने दी बड़ी चेतावनी

Iranian Frigate Sunk: US पनडुब्बी ने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत आइरिस डेना को टॉरपीडो से डुबो दिया है। ईरान के विदेश मंत्री ने इसे 'समुद्र में अत्याचार' बताते हुए परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।

प्रिया सिंह

US Attack On Iranian Ship: हिंद महासागर के नीले पानी में आज एक बहुत ही दर्दनाक और तनावपूर्ण घटना घटी है जिसने दुनिया को हिला दिया है। अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान के युद्धपोत आइरिस डेना को टॉरपीडो से अपना निशाना बनाया और उसे डुबो दिया। इस अचानक हुए हमले ने न केवल कई परिवारों को उजाड़ दिया है बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत से लौट रहे इस जहाज पर हुए हमले ने अब ईरान और अमेरिका के बीच की कड़वाहट को एक नए मोड़ पर पहुंचा दिया है।

समुद्र में अचानक हुई तबाही

श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक बहुत ही जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया है। अमेरिकी पनडुब्बी ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के ईरानी युद्धपोत आइरिस डेना पर टॉरपीडो से एक घातक हमला किया। इस हमले के बाद शक्तिशाली फ्रिगेट जहाज समुद्र की गहराइयों में समा गया और चारों तरफ केवल तबाही का मंजर दिखाई देने लगा। इस बदनसीब जहाज पर करीब 130 नाविक सवार थे जो अपने वतन और परिवार के पास लौटने की उम्मीद लगाए बैठे थे। शुरुआती खबरों के मुताबिक इस भीषण हमले में कम से कम 80 मासूम नाविकों की जान जा चुकी है जो एक बड़ी मानवीय क्षति है। यह हमला इतना अचानक और तीव्र था कि जहाज पर मौजूद किसी भी व्यक्ति को संभलने या बचने का कोई मौका नहीं मिला।

भारत के मेहमान पर हमला

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इस घटना पर बहुत ही तीखी और भावुक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आइरिस डेना भारतीय नौसेना का मेहमान था और वह विशाखापत्तनम से अपने देश वापस लौट रहा था। यह जहाज आंध्र प्रदेश में आयोजित 'मिलान इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू' अभ्यास का हिस्सा बनकर शांति का संदेश लेकर जा रहा था। अराघची ने इस हमले को 'समुद्र में अत्याचार' करार दिया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों की पूरी तरह धज्जियां उड़ाई गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका ने जो खतरनाक मिसाल कायम की है, उस पर उसे भविष्य में बहुत पछतावा होगा। ईरान इस दुखद घड़ी में अपने नागरिकों के साथ खड़ा है और इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उठाएगा।

बचाव कार्य और ऐतिहासिक घटना

श्रीलंकाई नौसेना ने तत्परता दिखाते हुए अब तक समुद्र की लहरों से 32 नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इन घायल नाविकों को तुरंत दक्षिणी बंदरगाह शहर गाले के करापितिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है। बाकी बचे हुए लापता नाविकों की तलाश के लिए अभी भी समुद्र में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

इतिहास के पन्नों में यह एक बहुत ही दुर्लभ और डरावनी सैन्य घटना के रूप में हमेशा के लिए दर्ज हो गई है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब किसी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से दुश्मन के जहाज को डुबोया है। इस हमले ने समुद्री सुरक्षा के समीकरणों को बदल दिया है और यह युद्ध का एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

दुनिया पर मंडराता गहरा संकट

जैसे-जैसे हताहतों की संख्या बढ़ रही है पूरी दुनिया में एक अनजाना सा डर और खौफ फैलता जा रहा है। भारत ने भी इस घटना पर अपनी नजरें बनाई हुई हैं क्योंकि यह जहाज विशाखापत्तनम से ही अपनी यात्रा शुरू की थी। लोगों को अब यह डर सता रहा है कि कहीं यह छोटी सी चिंगारी अब एक बड़े वैश्विक युद्ध की आग न बन जाए।

गाले के अस्पताल में भर्ती नाविकों के चेहरे पर उस खौफनाक हमले की यादें आज भी साफ तौर पर देखी जा सकती हैं। वे अपने उन बहादुर साथियों के लिए बहुत दुखी हैं जो अब इस दुनिया में नहीं रहे और समंदर में खो गए हैं। मानवता आज एक बार फिर युद्ध की इस बर्बरता के कारण खुद को बहुत शर्मसार और व्यथित महसूस कर रही है।

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