रोम: ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत का दूसरा दौर आज संपन्न हो गया। यह बातचीत रोम में आयोजित हुई, और दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने इसे सकारात्मक बताया है। इस वार्ता में ओमान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई। ईरानी विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि यह बातचीत ओमानी राजदूत के निवास पर दो अलग-अलग हॉलों में हुई।
ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि सीधे एक-दूसरे के सामने नहीं बैठे। इस वार्ता की मध्यस्थता ओमानी विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अल-बुसैदी ने की, जिन्होंने दोनों पक्षों के बीच लगातार संवाद बनाए रखा। बाघई ने कहा कि ईरान पूरी गंभीरता और तैयारी के साथ इन प्रतिबंधों को हटाने के लिए बातचीत में भाग ले रहा है।
बातचीत के दौरान ईरान और अमेरिका के बीच संभावित परमाणु समझौते पर चर्चा की गई, जिसमें ईरान ने यह स्पष्ट किया कि वह किसी नए समझौते में अमेरिका से सख्त गारंटी चाहता है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का कहना है कि अमेरिका भविष्य में इस समझौते से एकतरफा रूप से बाहर न निकले, और यदि ऐसा होता है, तो ईरान को हुए नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए। ईरान ने यह भी प्रस्ताव रखा कि उसके पास जो संवर्धित यूरेनियम का भंडार है, उसे किस तरह से प्रबंधित किया जाए, इस पर भी बातचीत होनी चाहिए। इसके साथ ही, प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया और वाशिंगटन से उच्चस्तरीय राजनयिक दौरे की उम्मीद भी जताई गई है। हालांकि, अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने इन प्रस्तावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने बस इतना कहा कि, "राष्ट्रपति का संदेश स्पष्ट है कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।"
ईरान ने बातचीत के दौरान यह फिर से स्पष्ट किया कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्य से है और इसे धार्मिक, राष्ट्रीय और सुरक्षा सिद्धांतों के तहत संचालित किया जा रहा है। ईरान के उप विदेश मंत्री अराकची ने इजराइल को क्षेत्र में परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र स्थापित करने में सबसे बड़ा बाधा बताया और यूरोप से आग्रह किया कि वह ईरान के खिलाफ फैलाई जा रही 'ईरानफोबिया' पर आधारित मानसिकता को छोड़कर जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाए।
इसी बीच, ईरान में शीर्ष नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित हुई, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और न्यायपालिका प्रमुख ग़ुलामहुसैन मोहसेनी एजेई शामिल थे। यह बैठक रोम में जारी वार्ताओं के संदर्भ में हुई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ईरान कूटनीतिक प्रक्रिया के साथ-साथ आंतरिक स्तर पर भी एकजुटता बनाए हुए है।