रोम: ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता का दूसरा दौर शुरू हो गया है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख भी भाग लेंगे। यह बातचीत ईरान के बढ़ते परमाणु कार्यक्रमों के संदर्भ में हो रही है। इस वार्ता का आयोजन शनिवार को रोम में हुआ, जैसा कि अमेरिकी अधिकारियों ने बताया। एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर जानकारी दी कि रोम के कैमिलुशिया क्षेत्र में स्थित ओमानी दूतावास में एक बंद कमरे में महत्वपूर्ण वार्ता हुई। यह बातचीत पिछले सप्ताहांत ओमान में हुई प्रारंभिक बैठक की अगली कड़ी थी।
इस वार्ता में मध्यस्थता एक बार फिर ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी द्वारा की जाएगी। बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी अरबपति और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पश्चिम एशिया मामलों के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ तथा ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची कैसे भूमिका निभाते हैं।
दरअसल, पहले चरण की बातचीत समाप्त होने के बाद अराकची और विटकॉफ के बीच थोड़ी देर की चर्चा हुई थी। हालांकि, 2015 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान हुई बातचीत के बाद से दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है। उस समय ईरान और विश्व शक्तियों के बीच परमाणु समझौता संपन्न हुआ था। अराकची ने मॉस्को में कल यह बयान दिया कि ईरान का विश्वास है कि उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ समझौता किया जा सकता है, बशर्ते अमेरिका व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाए। यह बयान दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और कूटनीतिक समाधान की ओर एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
इसी दौरान, इटली के विदेश मंत्री तजानी ने कहा कि अब रोम "शांति और संवाद का केंद्र" बन चुका है। वार्ता की मध्यस्थता एक बार फिर ओमान कर रहा है। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा के लिए दोनों देशों के बीच शनिवार को वार्ता का दूसरा दौर शुरू हो गया है।
बता दें कि पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। खतरा इस बात का है कि अमेरिका या इजराइल ईरान के परमाणु ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं, या फिर ईरान खुद परमाणु हथियार बनाने की अपनी धमकी को हकीकत में बदल सकता है। इसी बीच गाजा पट्टी में इजराइल और हमास के बीच जारी युद्ध और यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
हाल ही में यमन के हूती नियंत्रित एक प्रमुख तेल बंदरगाह, रास ईसा पर अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमले में 74 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और 171 लोग घायल हो गए। रात के समय हुए इस हमले में टैंकर ट्रकों में आग लग गई और वे मलबे में तब्दील हो गए।