इस्माइल हानिया (फाइल फोटो) 
विदेश

हमास चीफ इस्माइल हानिया को तेहरान में कैसे बनाया गया निशाना, इरान ने बताया

हमास चीफ इस्माइल हानिया की मौत तेहरान में कैसे हुआ, इसके बारे में ईरान ने खुद ही दास्तां बयां की है। साथ ही ईरान के अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड हानिया की मौत का बदला लेने की बात को दोहराई। उसने अमेरिका पर इस हमले में इसराइल का समर्थन करने का आरोप भी लगाया।

साक्षी सिंह

तेहरान: इरान ने बताया कि इस्माइल हानिया की तेहरान में मौत कैसे हुई है। ईरान के अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड ने शनिवार को कहा कि इजराइल ने छोटी दूरी के रॉकेट से हमास नेता इस्माइल हनिया को निशाना बनाया। उसने अमेरिका पर इस हमले में इसराइल का समर्थन करने का आरोप भी लगाया। सरकारी चैनल पर प्रसारित बयान में रिवोल्यूशनरी गार्ड ने हनिया की मौत का बदला लेने का आह्वान दोहराया।

रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि बुधवार को राजधानी तेहरान में हमास के राजनीतिक प्रमुख हनिया के आवास को निशाना बनाने के लिए सात किलोग्राम के हथियार से लैस रॉकेट का सहारा लिया गया।

जायोनी शासन ने हमले की योजना बनाई

रिवोल्यूशनरी गार्ड ने हमले से बड़े पैमाने पर तबाही मचने का दावा किया। हालांकि उसने यह नहीं बताया कि तेहरान में हनिया का आवास कहां था। हनिया ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए ईरान में था। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि जायोनी शासन ने हमले की योजना बनाई और इसे अंजाम तक पहुंचाया। इस काम में अमेरिका ने उसका साथ दिया। उसने धमकी दी कि युद्धोन्मादी और आतंकवादी जायोनी शासन को उचित समय, स्थान और पैमाने पर कठोर सजा मिलेगी।

ईरान ने इसराइल पर बनाया था निशाना

इसराइल ने हनिया की हत्या में न तो अपनी भूमिका होने से इनकार किया है, न ही इसे स्वीकार किया है। हालांकि, उसने पिछले साल सात अक्टूबर को उसके दक्षिणी क्षेत्र में हुए अप्रत्याशित हमले के बाद हनिया और अन्य हमास नेताओं को मार गिराने का संकल्प लिया था। हनिया की हत्या से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर संघर्ष छिड़ने और तेहरान के जवाबी कार्रवाई करने की सूरत में इसराइल और ईरान के सीधी लड़ाई में उलझने की आशंका बढ़ गई है। अप्रैल में ईरान ने इसराइल को सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश की थी।

ईरान किसका समर्थन करता है 

इरान की हमले की काेशिश को इसराइल ने इनमें से 99 फीसदी हमलों को नाकाम करने का दावा किया था। ईरान इसराइल को मान्यता नहीं देता है। वह इसराइल विरोधी उग्रवादी समूहों-फलस्तीन के हमास और लेबनाना के हिजबुल्लाह का समर्थन करता है।

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