खार्ग द्वीप तेल रिसाव इमेज, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

खार्ग द्वीप पर तेल रिसाव का दावा बेबुनियाद, ईरान ने सैटेलाइट रिपोर्टों को नकारा, कहा- जांच में नहीं मिला लीकेज

Iran Kharg Island oil leak denial: ईरान ने खार्ग द्वीप के पास समुद्र में तेल रिसाव की खबरों का खंडन किया है। जांच के बाद अधिकारियों ने तेल टर्मिनल और पाइपलाइनों को पूरी तरह सुरक्षित बताया है।

अमन उपाध्याय

Kharg Island Oil Spill: ईरान ने अपने सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र, खार्ग द्वीप के पास समुद्र में बड़े पैमाने पर तेल रिसाव होने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। गौरतलब है कि हाल ही में सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर यह दावा किया गया था कि खाड़ी क्षेत्र में ईरानी तेल हब के पास एक 'चिकनी परत' देखी गई है जो तेल लीक होने का संकेत देती है। हालांकि, ईरान की ऑयल टर्मिनल्स कंपनी ने इन रिपोर्टों को पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद बताया है।

निरीक्षण में नहीं मिला रिसाव का सबूत

ईरानी ऑयल टर्मिनल्स कंपनी के मुख्य कार्यकारी ने बताया कि रिपोर्ट सामने आने के तत्काल बाद उनकी टीम ने क्षेत्र का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान द्वीप के पास स्थित स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन, लोडिंग फैसिलिटी और टैंकरों की बारीकी से जांच की गई लेकिन रिसाव का कोई भी साक्ष्य नहीं मिला। अधिकारी ने बताया कि फील्ड इंस्पेक्शन और लैब टेस्टिंग के बाद यह पुष्टि हुई है कि समुद्र में तेल का "जरा सा भी निशान" मौजूद नहीं है।

क्षेत्रीय संस्थाओं ने भी किया दावों का खंडन

ईरानी अधिकारियों के अलावा, क्षेत्रीय समुद्री प्रदूषण निकाय 'मरीन इमरजेंसी म्यूचुअल एड सेंटर' (MEMAC) ने भी इलाके की स्थिति का जायजा लिया। उनकी रिपोर्ट के अनुसार भी प्रभावित क्षेत्र में लीकेज का कोई निशान नहीं पाया गया है। इससे पहले 'ऑर्बिटल ईओएस' नामक संस्था ने सैटेलाइट इमेजरी के हवाले से आशंका जताई थी कि लगभग 3 हजार बैरल से ज्यादा तेल समुद्र में बह चुका है और यह रिसाव 20 वर्ग मील क्षेत्र में फैलकर सऊदी अरब की ओर बढ़ रहा है।

ईरान के लिए क्यों अहम है खार्ग द्वीप?

खार्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है क्योंकि देश के 80-90 फीसदी कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप से होता है। यहाँ विशाल तेल टर्मिनल, पाइपलाइन और भंडारण की उन्नत सुविधाएं मौजूद हैं। दावों के अनुसार, इस सेंटर के पास हर दिन लगभग 70 लाख बैरल तेल जहाजों में भरने की क्षमता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तकनीकी फॉल्ट या लीकेज न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि ईरान के वैश्विक तेल व्यापार को भी बड़े स्तर पर प्रभावित कर सकता है।

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