Iran Protest Death: ईरान में मौजूदा सत्ता के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं और यह देशव्यापी फैल चुके हैं। प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के दौरान कम से कम 538 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10,670 से अधिक लोग हिरासत में लिए गए हैं। मानवाधिकार संस्था 'ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी' के अनुसार, प्रदर्शन के बीच इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गई हैं, जिससे घटनाओं का सही आकलन करना मुश्किल हो गया है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजश्कियन ने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया कि वो ईरान में अशांति फैलाने के लिए दंगाइयों और आतंकवादियों को प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के दुश्मन देश में अराजकता और अव्यवस्था फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही, पेज़ेश्कियन ने नागरिकों से हिंसक तत्वों से दूर रहने की अपील की और शांतिपूर्ण विरोध की दिशा में सुलह का रुख अपनाने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति पेजश्कियन के अलावा ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो अमेरिकी सेना और इजरायल को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने यह बयान तब दिया, जब ईरान की संसद में अमेरिकी विरोधी नारे लग रहे थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा कि ईरान आजादी चाहता है और अमेरिका मदद के लिए तैयार है।
वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान में चल रहे प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका देश घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने ईरान के नागरिकों के साहस की सराहना की और उम्मीद जताई कि ईरान के अत्याचारों से मुक्त होने के बाद इजरायल और ईरान के बीच रिश्ते फिर से मजबूत होंगे। नेतन्याहू ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से ईरान पर बातचीत की।
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डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर सैन्य हमला करने के विकल्प दिए गए थे, लेकिन अभी तक उन्होंने अंतिम निर्णय नहीं लिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी दी कि ट्रंप जो भी वादा करते हैं, उसे निभाते हैं। ईरानी संसद में कालिबाफ ने पुलिस और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की प्रदर्शनकारियों पर कठोर कार्रवाई के लिए तारीफ की और कहा कि गिरफ्तारी के बाद सख्त सजा दी जाएगी। उन्होंने अमेरिका और इजरायल को ईरान पर हमले के परिणामों की चेतावनी दी।