ईरान में मौत के आंकड़ों पर घमासान, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
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ईरान में मौत के आंकड़ों पर घमासान, सरकार ने कहा 3117, विपक्ष का दावा 30,000 मरे; स्वतंत्र जांच की मांग तेज

Iran Protest Death Toll: ईरान में हालिया प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों पर विवाद गहरा गया है। सरकारी आंकड़ा 3,117 है, लेकिन विपक्षी समूह 30,000 मौतों का दावा कर रहे हैं, जिससे देश में भारी उबाल है।

अमन उपाध्याय

Iran Protest Death Toll News In Hindi: ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों की वास्तविक संख्या को लेकर वैश्विक और आंतरिक दबाव बढ़ता जा रहा है। द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सरकार ने एक असाधारण कदम उठाते हुए मृतकों के नामों की सूची प्रकाशित करने की बात कही है।

यह कदम उन आरोपों को खारिज करने के लिए उठाया गया है जिनमें कहा जा रहा है कि सुरक्षा बलों ने 'मानवता के खिलाफ अपराध' किए हैं और मरने वालों की संख्या 30,000 तक हो सकती है।

सरकारी आंकड़े बनाम जमीनी हकीकत

ईरान के मार्टियर्स फाउंडेशन द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सुरक्षाकर्मियों सहित कुल 3,117 लोग मारे गए हैं। हालांकि, ईरानी सुधारवादियों और शिक्षक संघों ने इन आंकड़ों को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान टीचर्स यूनियन ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि यह समकालीन ईरानी इतिहास के दमन के सबसे खूनी अध्यायों में से एक है जिसमें हजारों महिलाएं और बच्चे खून से लथपथ हुए हैं।

स्वतंत्र जांच और पारदर्शिता की मांग

ईरान के भीतर से ही अब एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच समिति बनाने की मांग उठ रही है। सुधारवादी विश्लेषक अहमद जैदाबादी ने सुझाव दिया है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक तथ्य-खोज टीम को ईरान भेजा जाना चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा की विश्वसनीयता बनी रहे। वहीं, तेहरान विश्वविद्यालय के कानून प्रोफेसर मोहसिन बोर्हानी का मानना है कि पारदर्शिता के लिए एक वेबसाइट बनाई जानी चाहिए जहाँ नागरिक मृतकों की जानकारी अपलोड कर सकें क्योंकि परिवारों को सुरक्षा बलों द्वारा बदला लिए जाने का डर रहता है।

हजारों लोग हिरासत में, युवाओं पर संकट

हिंसा के अलावा, हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या भी चिंता का विषय है। हालांकि कोई आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि दशकों हजार लोग जेलों में बंद हैं। वकीलों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए अधिकांश लोग 1980 और 1985 के बीच जन्मे युवा हैं जो अपने परिवारों के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भी इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि नई पीढ़ी के ये प्रदर्शन देश में बड़े राजनीतिक बदलाव और चुनावी सुधारों की आवश्यकता को दर्शाते हैं।

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