राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

जिसने पेजेश्कियान को राष्ट्रपति बनाया, उसी को मिली जेल; ईरान में बड़ा सियासी भूचाल, IRGC के एक्शन से हड़कंप

US Iran War: ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने सुधारवादी नेताओं पर शिकंजा कस दिया है। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के करीबी सहयोगियों की गिरफ्तारी से देश में राजनीतिक तनाव चरम पर है।

अमन उपाध्याय

Iran Political Crisis Hindi: ईरान में जारी आंतरिक कलह ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने देश के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान को सत्ता में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सुधारवादी गुट के प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई को हाल के दिनों में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की आलोचना को दबाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

दिग्गज नेताओं पर कार्रवाई

ईरान के 'रिफॉर्मिस्ट फ्रंट' की प्रमुख आजर मंसूरी को तब गिरफ्तार किया गया जब उन्होंने प्रदर्शनों के दौरान युवाओं की मौत पर घृणा और गुस्सा व्यक्त किया था। मंसूरी ने अपने बयान में कहा था कि किसी भी ताकत और औचित्य से इस महान त्रासदी को साफ नहीं किया जा सकता। उनके साथ ही पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी के समय के उप विदेश मंत्री मोहसिन अमीनजादेह और राजनीतिक समिति के प्रमुख इब्राहिम असगरजादेह को भी हिरासत में लिया गया है।

गंभीर आरोप और सुरक्षा बलों का रुख

तेहरान के अभियोजक कार्यालय ने इन गिरफ्तार नेताओं पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन पर 'राष्ट्रीय एकता को निशाना बनाने', 'संविधान के खिलाफ रुख अपनाने और 'अमेरिका व इजरायल के साथ मिलकर काम करने' का आरोप लगाया गया है। न्यायपालिका के प्रमुख गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो लोग भीतर से इस्लामी गणतंत्र के खिलाफ बयान जारी करते हैं वे जायोनी शासन और अमेरिका के साथ हैं।

समर्थन के बावजूद राष्ट्रपति बेबस?

जून 2024 में 1.64 करोड़ से अधिक वोट पाकर सत्ता में आए राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। हालांकि उन्होंने प्रदर्शनों की जांच के लिए एक समिति बनाई है लेकिन जानकारों का मानना है कि उनकी स्थिति काफी कमजोर है क्योंकि सुरक्षा सेवाओं और प्रमुख निर्णय लेने वाली संस्थाओं पर उनका प्रभाव न के बराबर है। उनकी चुप्पी उनके समर्थकों के बीच निराशा पैदा कर रही है।

मानवाधिकारों का उल्लंघन

ईरान में यह दमन केवल राजनेताओं तक सीमित नहीं है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को जेल में रहते हुए सात साल की एक और नई सजा सुनाई गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या 3,000 है जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में यह आंकड़ा 5,000 के पार बताया गया है। यह पूरी स्थिति ऐसे समय में बन रही है जब ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में परमाणु वार्ता का दौर भी चल रहा है।

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